“संघर्षों पर विजय मंत्र”

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aashutosh anand
अवसरों का लाभ लो तुम
              समय को पहचान कर।
बहुमूल्य जीवन के सभी
             ऋतुओं को अपना मान कर||
                 तुम श्रेष्ठ कृति हो ब्रह्म की
                            उस मनुज का अवतार तुम हो।
                 धरा, अंबर, सूर्य, ग्रह,
                                ब्रह्मांड का विस्तार तुम हो।
                 तुम जगत की श्रेष्ठता के
                                वास्तविक नायक बने हो।
                 तुम अखिल ब्रह्मांड के
                                 हर तत्व के गायक बने हो।
                 पुनः नवनिर्माण कर
                                निज शक्तियों को जान कर।
                 अवसरों का लाभ लो तुम
                                  समय को पहचान कर||
हैं बहुत अवरोध तो
            अवरोध का खण्डन करो।
मार्ग के हर शूल को
              तुम कर्म से चंदन करो।
हो नहीं भयभीत
             चाहे घोर अंधकार हो।
अंतर्निहित विश्वास दीपक
             से तिमिर प्रतिकार हो।
बढ़ चलो सन्मार्ग पर अब
             अडिगता को ठान कर।
अवसरों का लाभ लो तुम
              समय को पहचान कर||
                       हाथ हैं दोनों बंधे
                             यह समय है प्रतिकूल माना।
                       सन्मार्ग पर चलते हुए
                                कुछ हो गई हो भूल माना।
                       बंधनों के पाश में
                                जकड़े अकेले पड़ रहे हो।
                       शत्रु का संहार कर
                                बाधाओं से तुम लड़ रहे हो।
                       हो विजय उद्घोष फिर
                                गाण्डीव का संधान कर।
                       अवसरों का लाभ लो तुम
                                 समय को पहचान कर||

परिचय–

नाम- आशुतोष’आनंद’दुबे
पिता- स्व आनंद दुबे
माता- श्रीमती राजेश्वरी दुबे
जिला- बिलासपुर छत्तीसगढ़
विधा- ओज, श्रृंगार, गीत, छंद, मुक्तक, सामयिक कविताएँ, आदि। 
साहित्यिक संस्था- संयोजक, अरपांचल साहित्य समिति एवं राष्ट्रीय कवि संगम, उपजिला इकाई (पेण्ड्रा)। 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।