टंगी है

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ashok babu
टंगी है
दीवाल पर,
तस्वीर दादा पर दादा की
धूल-मिट्टी उस पर
कर रही राज,
चला रही शासन।
जाले मकड़ी के
इर्द-गिर्द,
जैसे दबा रहे उसे
चंगुल में,
खामोश निशब्द तस्वीर
सह रही,
जुल्म नए-पुराने
यूं ही
हँसते,मुस्कुराते,
पर हम नहीं देख पा रहे
बुजुर्गों को
तस्वीर की गहनशीलता कोll

                                               #अशोक बाबू माहौर
परिचय:अशोक बाबू माहौर का जन्म १० जनवरी १९८५ को हुआ हैl मध्यप्रदेश के मुरैना जिले की तहसील-अम्बाह के ग्राम-कदमन का पुरा में आप रहते हैंl लेखन में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैंI कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैंI किताबें पढ़ना और स्वतंत्र लेखन करना आपकी अभिरुचि का विषय हैI सम्मान के रूप में ई-पत्रिका की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृत किए जा चके हैंI

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।