चांदनी-सी लग रही हो…

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bharat
कभी बृज में बजी थी रागिनी-सी लग रही हो तुम,
शरद के चन्द्रमा की चांदनी-सी लग रही हो तुम।
दिल के तालाब में बनकर कमल उतर जाओ,
आज बस एक मेरे प्रेम में संवर जाओ।
हो अगर फूल तो,बदहाल मन के आंगन में,
अपनी गंधों के रंग आ के यहाँ भर जाओ॥
किसी पावन ह्रदय की कामिनी-सी लग रही हो तुम,
शरद के चन्द्रमा की चांदनी-सी लग रही हो तुम।
                                                            # भरत त्रिपाठी
परिचय: भरत त्रिपाठी का सम्बन्ध मध्यप्रदेश के ग्वालियर से है। इसी प्रदेश के भिंड में १९८८ में जन्म हुआ है।इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग स्नातक तथा एम.टेक.आपने किया है। काव्य में मुख्यतः श्रृंगारिक गीत लिखने के साथ साथ आपने हिन्दी के विभिन्न छन्दों की भी रचना की है। इसमें दोहा,चौपाई ,घनाक्षरी,कुंडलियां और आल्हा प्रमुख है। आपकी कुछ ग़ज़लों को भी सराहना प्राप्त हुई है। देश के बड़े महाविद्यालयों के साथ ही असम में आयोजित काव्य आयोजनों एवं देश के अन्य प्रतिष्ठित मंचों से सफल काव्य पाठ किया है। 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।