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ज़िन्दगी भी अज़ीब
रंग दिखाती है,
जो अपना हो नहीं सकता
उसके पास ले जाती है।
क्यों,ऐसे मोड़ पर
छोड़कर चली गई मुझको,
कि मैं चाहकर भी…..
कुछ चाह नहीं सकती।
कुछ बातों पर अपना
बस नहीं चलता,
वो तो यूं ही
हो जाया करती हैं।
तेरी दुनिया के
रुप निराले देखे,
हर मोड़ पर
चोट पहुँचाने वाले देखे,
कुछ हाथों से तो कुछ
जुबां से चोट देते हैं…।
हर किसी का मुकद्दर
हो गया निर्धारित,
लेकिन सब दांव
लगाने वाले जुंआरी देखे।
इस बार मेरी कोई
खता न थी ‘श्वेता’,
फिर भी संग मेरे लिए
हाथों में उठने वाले देखे हैं।
क्या करें हम कुछ
समझ नहीं आता,
बस दुआ के लिए
हाथ उठा रखे हैं॥
#मनु श्वेता
परिचय : मनु श्वेता उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर से हैं। जन्मतिथि ८ जुलाई १९८१ है,और शहर मुज़फ्फर नगर में ही निवास है। एम.ए. व बी.एड.की शिक्षा हासिल कर चुकी मनु श्वेता का कार्यक्षेत्र अध्यापन है। आप तुकांत, अतुकांत कविताओं के साथ ही लेख आदि भी लिखती हैं। विभिन्न काव्य संग्रहों,पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कविताएं प्रकाशित हुई हैं। सम्मान के रुप में आपने आगमन युवा प्रतिभा सम्मान-२०१६ तथा ऋतुम्भरा सम्मान पाया है।
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Mon Sep 11 , 2017
अश्क बहे मेरे दो नयनों से, मन की पीड़ा बयां करने को मन का मैल धुल जाए रे सखी, अश्रु भरे नयनों के जल से। बह जाने दो दिल के अरमां, आंसूओं की धारा बन के धुल जाने दो सारे मन का मैल, तुम्हारे अपने अश्रु के जल से। आँसू […]