अमेरिका से भारत यात्रा पर आए हिन्दी सेवियों को भाषा सारथी सम्मान से किया सम्मानित

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दिल्ली। अमेरिका की अग्रणी हिन्दी सेवी संस्थान हिन्दी यूएसए ने वहाँ हिन्दी सिख रहें बच्चों को भ्रमण के लिए हिंदुस्तान लाए, उन बच्चों को सोमवार को दिल्ली में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा ‘भाषा सारथी सम्मान’ से संस्थान की दिल्ली प्रदेश अध्यक्षा रिंकल शर्मा द्वारा हिन्दी के सारथियों को सम्मानित किया।
अमेरिका में लगभग 4000 से अधिक बच्चों में प्रतिस्पर्धा से चयनित 14 बच्चें इस वर्ष हिन्दी यूएसए द्वारा भारत भ्रमण के लिए लाए जिनमें आस्था राजपाल, अभिनव आर्य, अनिकेत झा, अनुषा गुप्ता, आश्रित आत्माराम, क्रिशा सोनेजी, मुस्कान सेकसरिया, प्रिशा अग्रवाल, रोहन शर्मा, संजना गोयल, सौमित्र प्रभु, शिवांक तिवारी, सुहानी गुप्ता, वीरेन असरानी रहें, अमेरिका से इसी दल में राज मित्तल एवं कविता प्रसाद नेतृत्व कर रहें थे जो हिन्दी यूएसए के प्रतिनिधि है।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष रिंकल शर्मा ने बताया कि ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान आज गौरवान्वित महसूस कर रही है क्योंकि आज जो बच्चें हिंदुस्तान के अतिरिक्त भी हिन्दी भाषा को सिख-समझ रहें है यह हिन्दी की वैश्विक उन्नति का कारक है।’
ज्ञात रहें कि मातृभाषा उन्नयन संस्थान वर्तमान में 11 लाख से अधिक समर्थकों के साथ भारत की सबसे बड़ी हिन्दी सेवी संस्थान के रूप में उभर रही है और हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए सम्पूर्ण भारत में कार्य कर रही है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।