बात

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hemant bordiya
ये क्या कहा,ये कैसी हैरानी की बात की,
सहराओं के प्यासों से क्यूँ पानी की बात की।

मिलता रहा सुकून मुझे उसके शानो पर,
फिर इश्क मोहब्बत के मानी की बात की।

एहसास कभी उसके भुलाने को जो चले,
हर शख्स से फिर उसकी निशानी की बात की।

लैला नहीं,सोहनी नहीं,न हीर की कही,
अपनी गज़ल में अपनी दीवानी की बात की।

बगिया के सारे फूल भी हैरान हो गए,
भँवरों ने मिल के उसकी जवानी की बात की।

तुझको ही पार करना है ये सारे मरहले,
दरिया से कभी किसने रवानी की बात की ?

मेरी हजार गलतियाँ वो माफ कर गई,
माँ ने फिर भी मुझपे गुमानी की बात की।

दुश्मन के घर फूँके उन्होंने खेल जान पर,
गद्दारों ने सबूत ओ निशानी की बात की।

घरों से जो उठने लगा…बूढ़ो का आसरा,
बच्चों से किसने राजा की,रानी की बात की।

रक्खा नहीं हिसाब किसी दर्द का कभी,
जो बात भी चली तो कहानी की बात की।

मौसम के धूप, आब सभी दरगुज़र किए,
यारों से हमने प्रीत सुहानी की बात की॥

                                                                              #हेमंत बोर्डिया

परिचय: हेमंत बोर्डिया मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के धामनोद से हैं। आपकी जन्मतिथि- २८ जून १९७६ एवं जन्म स्थान-खरगोन है। विज्ञान में स्नातक श्री बोर्डिया का कार्यक्षेत्र-विपणन प्रबंधक(रियल एस्टेट)है। लेखन में विधा -ग़ज़ल और गीत है। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज से द्वेष, द्वंद्व, छल और अमानवीयता जैसी बुराइयों को इंगित करना है। माध्यम प्रभावी हो और असर अंदर तक पहुंचे,तभी इलाज संभव होता है,चाहे इंजेक्शन हो या विचार।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।