जिंदगी

0 0
Read Time2 Minute, 11 Second
rani soni
जिंदगी की गाड़ी को किस कदर,चलाना पड़ता है,
निकालकर पहिए खुद जुट,जाना पड़ता हैं।
कहीं सफर में खुशी मिले, कहीं राह में ग़म।
रोते-रोते हमको पल में,मुस्कुराना पड़ता है।
बड़ी नाजुक-सी डोर है,जीवन में रिश्तों की,
हर ताना-बाना सलीक़े से,सजाना पड़ता है।
कठपुतली की तरह,जी रहे हैं जीवन अपना,
जाने कौन-सी डोर को,खींच जाना पड़ता है।
किसी के सुर अलग है,किसी की राग अलग है,
परिवार है सबके साथ,ताल मिलाना पड़ता है।
खुशियों में मुस्कुराकर,गम को गले लगाकर,
जीवन का हर फ़र्ज़,यूं ही निभाना पड़ता है।
चाहे जितनी ऊंची, उड़ान भर ले तू इंसान,
नजरों को तो जमीं पर ही,टिकाना पड़ता है।
अपना-अपना कहने वाले,चारों और मिलेंगे तुमको,
कहती है दुनिया आफ़त में,गधे को बाप बनाना पड़ता है।
नहीं रहती जीवनभर साथ,छाया बूढ़े बरगद की,
कुछ तो जीवन को तेज किरण से,झुलसाना पड़ता है।
खाली पेट रहकर सजाया,जो आशियाँ अपना,
खाली हाथ ही एक दिन,निकल जाना पड़ता है।
आती माँ, अपना दामन ओढ़ाने को,
‘रानी’ काँटों से दामन,खुद ही बचाना पड़ता है।
                                                                 #रानी सोनी(चन्दा)
परिचय: रानी सोनी(चन्दा) की जन्मतिथि-८ जून १९७६ एवं जन्म स्थान-रतनगढ़(राजस्थान) है। आप राजस्थान के शहर-रतनगढ़ से ही हैं। वर्तमान में जयपुर में रहती हैं। प्रारम्भिक शिक्षा हासिल की है,और इसके बाद आपका कार्यक्षेत्र गृहिणी है। आप स्वतंत्र लेखन में रुचि रखकर सक्रिय हैं। एक किताब में आपकी 6 रचनाओं को स्थान मिला है तो एक कविता को सांत्वना पुरस्कार भी मिल चुका है। लेखन का उद्देश्य-अपने मन के भावों को बाहर लाना है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बात

Mon Aug 28 , 2017
ये क्या कहा,ये कैसी हैरानी की बात की, सहराओं के प्यासों से क्यूँ पानी की बात की। मिलता रहा सुकून मुझे उसके शानो पर, फिर इश्क मोहब्बत के मानी की बात की। एहसास कभी उसके भुलाने को जो चले, हर शख्स से फिर उसकी निशानी की बात की। लैला नहीं,सोहनी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।