करार है,करार है

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 kasim
चमन-चमन खिला हुआ कली-कली निखार है।
जहां में आज हर तरफ मुहब्बतें हैं प्यार है॥
खिले हुए हैं गुंचे सब फ़ज़ा भी ख़ुशगवार है।
बसंत है तो हर तरफ बहार है बहार है॥
भरी हुई है ख़ुशबुओं से आज तो बयार है।
हवाएं झूमती हैं और बज रहा सितार है॥
बसंती रुत के आने से बुझा हर इक शरार है।
मसर्रतें जहां नहीं वो कौन-सा दयार है॥
हसीन है ये बदलियां घटाओं में ख़ुमार है।
बसंत का बहार से क़रार है क़रार है॥
ये रंगों-बू की निकहतें हर इक शजर हरा-भरा।
लगे ज्यूं सहरा में बरसती रस भरी फुहार है॥
ये गुनगुनाते भंवरे और कोयलों की नग़्मगी।
ये मोर रक्स कर रहे ख़ुशी का ये त्योहार है॥
इन आंखों ने समंदरों की लहरें जब से देख ली।
तो यूं लगा कि सागरों में उठ रहा ज्वार है॥
हसीन लम्हें जो मिले बसंत के तो हो गई।
हमारी ज़िंदगी भी ‘क़ासिम’ आज ख़ुशगवार है॥
                                                                 #क़ासिम बीकानेरी
परिचय: लेखन क्षेत्र में क़ासिम बीकानेरी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। १९७८ में १० जनवरी को जन्मे होकर हिन्दी सहित उर्दू,अंग्रेजी एवं राजस्थानी भाषा में भी लेखन कर रहे हैं। साहित्य के ज़रिए आप समाजसेवा से २५ बरस से जुड़े हुए हैं। लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,नज़्म क़तअा, कविता,लघुकथा,कहानी,आलेख तथा उपन्यास आदि है। लेखन के ख़ास विषय देश,समाज व व्यक्तिगत जीवन में आसपास घटित होने वाली महत्वपूर्ण घटनाएं व अनुभव ही है। शिक्षा की बात करें तो उर्दू एवं समाजशास्त्र में एम.ए. के साथ ही इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में आप आईटीआई हैं। आपकी रचनाओं को स्थानीय सहित देशभर की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में २० से अधिक वर्ष से लगातार स्थान मिला हुआ है। सम्मान एवं पुरस्कार के रुप में हायर सेकंडरी की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर १९९१ में पुरस्कृत,सृजन संगी अलंकरण २००५,शिक्षक दिवस पर सम्मान,
‘ताज बने सरताज’ प्रोत्साहन पुरस्कार सहित बीकानेर रतन आदि हैं। ऐसे ही कई संस्थाओं ने भी आपको प्रतिभा सम्मान,युवा प्रतिभा सम्मान तथा साहित्य श्री सम्मान आदि दिए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तरफ से उर्दू-हिन्दी राजस्थानी शब्दकोश निर्माण कार्यशाला में बतौर उर्दू प्रतिनिधि हिस्सा लिया है तो,हिन्दी-राजस्थानी फिल्मों एवं एलबम में गीत लिखे हैं। साथ ही मुख्य सहायक निर्देशक के तौर पर भी कार्य किया है। आप सोशल मीडिया पर भी सक्रिय और काव्य पाठ भी करते हैं
समाजसेवा के क्षेत्र में आपके उल्लेखनीय कार्यों में ग़रीब-ज़रूरतमंद व्यक्तियों की हरसंभव सहायता करना,
ग़रीब बच्चियों के विवाह में सहायता और अपनी रचनाओं से सामाजिक बुराइयों का पुरज़ोर विरोध करना है। साहित्य के क्षेत्र में २ साल से हर रविवार सुबह साप्ताहिक काव्य पाठ कार्यक्रम करवाकर नए कवियों को प्रोत्साहन( राजस्थान के ५ जिलों में शाखाएं)देना भी है। अपने आलेखों के माध्यम से जागरुकता फैलाने की निरंतर कोशिशें और सौहार्द के लिए लोगों को जागरूक करना भी आपका प्रयास रहता है। ‘मेरी अपनी भी एक दुनिया है’ (साझा संग्रह) प्रकाशित है,तो लगभग १० पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होंगी। आकाशवाणी एवं विभिन्न रेडियो चैनलों से रचनाओं का प्रसारण होता रहता है। आपके लिए साहित्य और लेखन व्यवसाय न होकर आत्मसंतुष्टि का जरिया है। क़ासिम बीकानेरी कई संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं। आपका निवास राजस्थान के बीकानेर स्थित भिश्तियान मोहल्ला में है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।