विरह की नगरी में मिलन की नगरी कैसे बसाऊं..

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विरह की नगरी में मिलन की नगरी कैसे बसाऊं ?
लाक डाउन लगा है, तेरे पास कैसे अब आऊ ?

उदास बैठी हूँ, बस तेरा ही इन्तजार कर रही हूँ |
whatsapp के जरिये,अपनी व्यथा भेज रही हूँ ||

कब आयेगी मिलन की घड़ी,ये रब को ही है पता |
गुमसुम सी बैठी हूँ,खाती पीती नहीं,तुमको क्या पता ?

आँसू नहीं रहे आँखों में,तेरी याद में रोते रोते |
तुझ को याद कर लेती हूँ,बिस्तर पर लेटे लेटे ||

सूख कर काँटा हो गयी,चलना फिरना है मुश्किल |
जब से प्यार किया दिल को समझना है मुश्किल ||

अब आन मिलो सजना तुम बिन रहा नहीं जाता |
जख्म इतने गहरे हो गये अब दर्द सहा नहीं जाता ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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matruadmin

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एक कवि के मन की व्यथा

Wed Apr 22 , 2020
विरह की नगरी में मिलन की नगरी कैसे बसाऊं ? लाक डाउन लगा है, तेरे पास अब मै कैसे आऊ ? उदास बैठी हूँ, बस तेरा ही इन्तजार कर रही हूँ | whatsapp के जरिये,अपनी व्यथा भेज रही हूँ || कब आयेगी मिलन की घड़ी,ये रब को ही है पता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।