न्याय की गुहार

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sudha kanouje

सुबह-सुबह जब मैं कार्यालय के लिए तैयार हो रही थी,तभी फोन की घंटी बजीl मैंने फोन उठाया,दूसरी तरफ से आवाज आई `मैडम चौकीदार ने आज फिर बच्ची के साथ अभद्र व्यवहार किया है`, मैडम ऐसा तीसरी बार हुआ है। हर बार मुझे ही छोड़ो जाने दो कहकर शांत कर दिया जाता है।
बच्चियों द्वारा जब भी कोई शिकायत की गई,मेरे द्वारा सभी जिम्मेदार लोगों को अवगत कराया गया,किंतु आज तक किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं आया। बस बदलती है तो सिर्फ बच्चियां।`
मैडम अजीब बात है,उन बच्चियों के माता-पिता को भी डरा-धमकाकर या तो शांत कर दिया जाता है,या मुझ पर ही कोई उल्टा आरोप लगाकर मुझे ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। ऐसा क्यों होता है मैडम?`
`ऊपर से लेकर नीचे तक के सारे जिम्मेदार लोग सिर्फ मामले को रफा-दफा करने में लग जाते हैं। आखिर आप ही बताइए-मैं कहाँ जाऊं,किससे शिकायत करूँ, कौन है ऐसा जो मुझे और मेरी बच्चियों को न्याय दिला सके।`
इससे पहले कि मैं कुछ कह पाती,बोलते-बोलते उसका गला भर आया और फोन कट गया।
मेरे जहन में एक सवाल तीर की तरह आज भी चुभ रहा है कि `आखिर कौन है ऐसा जो मुझे और मेरी बच्चियों को न्याय दिला सके।`

                                                                                   #सुधा कनौजे 
परिचय : श्रीमती सुधा कनौजे मध्यप्रदेश के दमोह में न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी (विवेकानंद नगर) में रहती हैंl श्रीमती कनौजे दमोह के  जिला शिक्षा केन्द्र में एपीसी(जेण्डर) हैंl 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।