कभी-कभी ऐसा भी

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bagga
कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है,
पंछी आशियाने से जुदा हो जाता है।
वो बचपन,जब खेले थे साथ-साथ,
लड़ना भी शामिल था अक्सर जिसमें…
वो बचपन भी कहीं खो जाता है।
ऐसा भी होता है अक्सर कि,
माँ का कलेजा,माँ से जुदा हो जाता है।
बेटी होती है बड़ी तो…
घरवालों से पहले,
बाहर वालों को पता चल जाता है।
                                    #नीलू बग्गा
लेखक परिचय : लुधियाना निवासी नीलू बग्गा लेखक और शायरा के रुप में लेखन के क्षेत्र में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। जिस छोटी उम्र में बच्चे खेलते हैं ,उस उम्र से ही ये गीत लिखती रही हैं। 1978 में जालंधर के ब्यास पिंड में  जन्मी नीलू बग्गा लुधियाना में पली हैं और बचपन से ही लिखने का शौक रखती हैं। डायरी भी लिखा करती थी। वर्तमान में कई साहित्यिक संस्थाओं से लेखक के तौर पर जुड़ी हुई हैं।
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matruadmin

One thought on “कभी-कभी ऐसा भी

  1. चल फिर एक मुकमल किताब लिख डाले…
    जिस में तेरी रुसवाइयों से लेकर…
    तेरे हर तिषणों का जिक्र हो …
    और तूँ मेरे बाद जब जब उसे पढ़ें …
    मेरी उस मुहोब्बत को याद करे …
    जिसे मैने बिना किसी इवज में तुम से किया…
    Neelu Bagga

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।