हामिद अंसारी को जवाब

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suresh anjan
दिल बौने हैं सीने में पर,
ऊंचा कद पा जाते हैं।
फितरत ओछी रखने वाले,
ऊंचा पद पा जाते हैं॥
पदवी के चक्कर में खाते,
भारत माँ की कसमें ये।
सत्ता का सुख भोग लिया तो,
तोड़ रहे हैं रस्में ये॥
भारत में हैं नहीं सुरक्षित,
अब ये जुमले बन्द करो।
काम अरे ओ नमक हरामों,
देश भले के चंद करो॥
                                                                                   #डॉ. सुरेश अनजान
परिचय: डॉ. सुरेश अनजान मध्यप्रदेश के सोयत(आगर मालवा) में रहते हैं। जन्म-५ अक्टूबर १९७९ को गांव-लोहारिया में हुआ है। शिक्षा बीएससी सहित जनरल नर्सिंग एन्ड मिडवाइफरी (बेंगलुरू) और मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं। देश में जागृति फैलाने के लिए आपने 
लेखन विधा में ओज व वीर रस को अपना रखा है। लेखन का उद्देश्य यही है कि,लोगों में देशप्रेम बना रहे। उन्हें देश के प्रति अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करते रहते हैं।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।