कान्हा

Read Time0Seconds
 anand
केवल तू  ही  तू कान्हा,
दूजी  न आरजू  कान्हा।
पूजा करता हूँ तुम्हें बड़े अरमान के साथ,
ख्वाहिशें पालता हूँ बड़े अभिमान के साथ।
देखो मुझसे कभी तुम भी रूठ जाना नहीं,
सोचता हूँ तुम्हें ही निर्दयी सम्मान के साथ॥
ख्वाहिशें पाने की तुम्हें पूरी करो न करो पर,
धड़कन में बसे हो बांसुरी की तान के साथ।
तुझसे जुदा तू ही बता अपनी जात कहाँ है,
कान्हा आन मिलो अब तो मेरे प्रान के साथ॥
ख्वाहिश पाली है तो सुनो केवल तुम्हारी,
खेल न खेला करो केवल मेरी जान के साथ।
मर्जी तुम्हारी मोहन,केवल अर्जी हमारी है,
दुनिया से बुलाना ख्वाहिश है शान के साथ॥
                                                                    #आनंद पाण्डेय ‘केवल’
परिचय : आनंद पाण्डेय ‘केवल’ की उम्र 45 वर्ष है और आप  सेवनिवृत्त शिक्षक (मुंबई) हैं। मुंबई में निवास है,पर पैतृक निवास उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में है। आप कार्यक्षेत्र के रुप में मुंबई में कम्पनी में कार्यकारी संचालक के तौर पर सक्रिय हैं। लेखन में रुचि है और पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती हैं। मात्र एक वर्ष का लेखन अनुभव है और भावों की तुकबंदी पर अधिक लिखते हैं। तबला वादन में स्नातक होने के साथ ही कुछ अन्य उपलब्धियां भी पाई हैं। कवि मित्रों की रचनाएँ पढ़ने का चिंतन तथा मनन करना आपको अच्छा लगता है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बचपन के वो दिन

Mon Jul 31 , 2017
मुझे याद है.. बचपन के वो दिन, कागज की कश्ती बनाकर पानी में तैराना, बरसात के दिनों में उमड़ते-घुमड़ते बादलों के बीच कल्पना के घोड़े दौड़ाना, मनचाहे चरित्रों को तलाशना, हाँ मुझे याद है। मुझे याद है.. फर्श पर पानी का फैलाना, छप-छप करना, माँ का गुस्सा,दादी का प्यार बहन […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।