मेरी दीवानगी का आलम,
मेरी उम्मीद ए वफ़ा हो।
तुम पर है ऐतबार मेरा,
क्यों तुम ख़फ़ा हो॥
प्यासा एक सेहरा मैं,
तुम प्रेम की घटा हो।
बरसती मेरी आंखों से,
हया हो-अदा हो ॥
#वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,इसलिए लेखन में हुनरमंद हैं। साथ ही एमएससी और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Mon Jul 17 , 2017
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