
अखंड विश्व समा जाऐ एक शब्द गुरु में,
संपूर्ण देवता समा जाऐ एक शब्द गुरु में।
किसे करूं नमन प्रथम ईश्वर या गुरु को ,
ईश्वर का मार्ग दिखाए ,प्रथम प्रणाम गुरु को ।
राह में खड़क सौ पथ संचालित करे गुरु ही ,
अथाह समुद्र , नैया पार लगाऐ गुरु ही ।
मैं ऋणी प्रकृति माँ, जन्मदाता और गुरु की ,
नतमस्तक हूं जीवन भर आभारी हर गुरु की ।
इस कलयुग में भी ईश्वर समान गुरुजी,
सत मार्ग दिखाएं पथरीली राह में गुरुजी ।
भक्ति करूं जब दे बल अपार गुरुजी ,
शिष्य ईश्वर के बीच सेतु बने गुरुजी ।
सातों जन्म सफल पीठ पर हाथ रहे गुरु का,
ज्ञान भास्कर ,शांति सागर वंदन करूं गुरु का।
#डॉ. सुनीता फड़नीस,
इन्दौर, मध्यप्रदेश

