हिन्दी योद्धा डॉ. वैदिक को ‘शब्दांजलि’

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साहित्य जगत ने कहा ताउम्र हिन्दी के लिए संघर्ष करते रहे डॉ. वैदिक

मातृभाषा उन्नयन संस्थान एवं श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति ने किया आयोजन

इंदौर (9 अप्रैल)। हिन्दीयोद्धा, वरिष्ठ पत्रकार, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के संरक्षक डॉ. वेदप्रताप वैदिक को रविवार को शिवाजी सभागार में साहित्य जगत ने शब्दांजलि अर्पित की।
श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति और मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा आयोजित ‘शब्दांजलि’ कार्यक्रम में साहित्य और पत्रकारिता जगत की हस्तियों ने पत्रकारिता, हिन्दी और साहित्य को लेकर डॉ. वैदिक के महत्त्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए उन्हें शब्द सुमन अर्पित किए।
शब्द सुमन अर्पित करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार अष्ठाना, श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर, हिन्दी परिवार के अध्यक्ष हरेराम बाजपेयी, वीणा के सम्पादक राकेश शर्मा, विचार प्रवाह साहित्य मंच के अध्यक्ष मुकेश तिवारी, कबीर जन विकास समूह के डॉ. सुरेश पटेल, म.प्र. लेखक संघ से सदाशिव कौतुक, साहित्य परिषद् के अध्यक्ष त्रिपुरारीलाल शर्मा, वामा साहित्य मंच से डॉ. प्रतिभा जैन, विद्याजंलि भारत से दामोदर वीरमाल, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नितेश गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार धर्मेश यशलाह, साहित्यकार जनार्दन शर्मा व अखण्ड संडे के मुकेश इन्दौरी आदि शामिल रहे। संचालन मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया।


इस मौके पर लाखन मण्डलोई, विक्रम सिंह बारदिया और उनकी मंडली द्वारा कबीर भजनों की प्रस्तुति के माध्यम से डॉ. वैदिक को स्वरांजलि भी अर्पित की गई।

वक्ताओं ने श्री वैदिक को हिन्दीयोद्धा, श्रेष्ठ पत्रकार और सरल-सहज व्यक्तित्व के रूप में याद किया। कहा कि उनके जाने से हिन्दी और पत्रकारिता जगत को बड़ी क्षति हुई है। वो अपने बाल्यकाल से लेकर ताउम्र हिन्दी के लिए संघर्षरत रहे।

श्री कृष्णकुमार अष्ठाना ने डॉ. वैदिक के पत्रकारिता में योगदान को याद करते हुए उन्हें देशभक्त पत्रकार बताया।
श्री अरविंद जवलेकर ने हिन्दी को लेकर डॉ. वैदिक के लगाव की चर्चा की, वहीं श्री हरेराम बाजपेयी ने कॉलेज जीवन के सहपाठी डॉ. वैदिक की सहजता और सरलता को किस्सों के माध्यम से याद किया।
श्री राकेश शर्मा ने कहा कि ‘डॉ. वैदिक का भाषा प्रेम केवल नारा नहीं था बल्कि वह जानते थे कि संस्कृति को भाषा के माध्यम से ज़िंदा रखा जा सकता था।’

श्री मुकेश तिवारी ने कहा कि ‘डॉ. वैदिक का जाना हिन्दी जगत का बड़ा नुक़सान है, वह बाल्यकाल से लेकर सारी उम्र हिन्दी के लिए संघर्ष करते रहे।’ डॉ. प्रतिभा जैन व जनार्दन शर्मा ने कविता के माध्यम से शब्दपुष्प अर्पित किए।

इस मौके पर डॉ. वैदिक के छोटे भाई श्वेतकेतु वैदिक, भतीजे सौरभ वैदिक, शुभम वैदिक हिन्दी साहित्य समिति के पदाधिकारी अनिल भोजे, प्रो. पुष्पेंद्र दुबे, घनश्याम यादव, राजेश शर्मा, छोटेलाल भारती, कमलेश पाण्डेय, मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कोपरगाँवकर, लक्ष्मीकान्त पण्डित, वाणी जोशी व हर्ष जैन मौजूद थे।

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