ये देश तरक्की वाला है

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ये देश तरक्की वाला है
बीमार को दवा न मिलती
पग पग पर मधुशाला है
ये देश तरक्की वाला है
हाय हाय गरीब कर रहे
पल पल असहाय मर रहे
जहां तहां सिहर कहर रहे
कौन सुनने वाला है
ये देश तरक्की वाला है
दण्डित गुनहगार नही है
अपनो से अब प्यार नही है
खुशियो का त्यौहार नही है
छिनता रहा निवाला है
ये देश तरक्की वाला है
पढ लिखकर ठोकर खाते है
युवा नही काम पाते है
सब ताडना सह जाते है
सबकुछ गडबड झाला है
ये देश तरक्की वाला है
मोझ दायिनी स्वयं दुखित है
देख दुर्दशा आज दुखित है
गंदगी से खुद ही पीडित है
जल का कौन रखवाला है
ये देश तरक्की वाला है
मां बाप का मान न करते
हम अपने को बडा समझते
नये विवाद मे रोज उलझते
सम्मान नही जिसने पाला है
ये देश तरक्की वाला है
सब मान मर्यादा भूले
झूठ गुमान मे फिरते फूले
कृत्रिम हो रहे हम है भूले
दिखावा का जाला है
ये देश तरक्की वाला है
विन्ध्यप्रकाश मिश्र
नरई संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।