त्रासदी

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सुवर्ण कानन में फलित
प्राणों की स्वप्न मंजरी

     शाख से तिक्त विरक्त
     पर्ण किसलय और पंखुड़ी 

     रुदाल तारागण रुग्ण सूर्य
     धरा प्रतीत जैसे ‌यमपिंड 

     जीवन छिन्न प्राण दुर्लभ 
     काल प्रखर और प्रचंड

   घोर तम सर्वत्र व्याप्त  
   मृत्यु तुल्य अभी त्रासदी  

   तमस दिवा पूर्ण कालरात्रि 
   कलुषित समय सम शताब्दी

   अष्ट दिशा मचा हाहाकार 
    भग्न हृदय स्पंद शेष

    प्रत्येक प्रतीक्षारत प्राण 
    उद्धारक एक‌ याचना अशेष

     ज्ञान -विज्ञान अपोह-पोह
     नियम -अनियम सर्व मध्य

   नतमस्तक उन्म्मिलित नेत्र
   समर्पित भाव  अंजलि बद्ध

#डॉ सीमा भट्टाचार्य

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
#परिचय-
दिल्ली पब्लिक स्कूल बिलासपुर छत्तीसगढ़ में संस्कृत विभाग में अध्यक्षा पोस्ट में कार्यरत।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।