जय नाग देवता

0 0
Read Time1 Minute, 29 Second

धरती मैय्या टीकी जिनके फनों पर
विष्णु जी बैठे शेषनाग की शैय्या पर ।
कृष्ण ने नाग के सहारें की यमुना पार
नाग सुशोभित है भोलेनाथ के गलें पर ।।

जन्मेजय ने किया जब नागों का दाह संस्कार
आस्तिक मुनि ने किया नाग वंश का उद्धार ।
पंचमी पर ही जन्मेजय ने दिया जीवन दान
तभी से मनाया जाता है नागपंचमी का त्यौहार ।।

कालियादेह नाग के फन पर नाचें गोपाल
कर इसका उध्दार,यमुना को किया खुशहाल ।
समुद्र मंथन में वासुकि नाग की रही भूमिका
खेत – खलिहान के कहलाते नाग क्षेत्रपाल ।

नाग हमारी रक्षा करते , होकर परम उदार
हमको करना चाहिये , उनका सदा सत्कार ।
पूजन मात्र से होता हैं कालसर्प दोष निवारण
खुशियों की करते जीवन में रंगीली बौछार ।।

नाग देवता की आराधना करती हर नैय्या पार
भययुक्त होकर हम करे इनका जय – जयकार ।
दूध, चंदन,इत्र,पुष्प की खुशबू लगती है प्यारी
भक्तों के जीवन में भरते सुख समृद्धि का भंडार ॥

गोपाल कौशल
नागदा जिला धार म.प्र.

                       

matruadmin

Next Post

उपराष्ट्रपति जी के विचार पर प्रधानमंत्री मोदी जी को अमल करना चाहिए।

Fri Aug 13 , 2021
शिक्षा में मातृभाषा अपनाई जाएगी, तब ही राष्ट्र की युवा पीढ़ी स्वाभाविक रूप से अपने जीवन के हर क्षेत्र में देश की सभी भाषाओं को बिना आग्रह के अपना लेगी। नयी शिक्षा नीति में देश की सभी भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने की ओर बिना विलंब ध्यान दिया जाना […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।