गीता डिप्लोमा परिक्षा मे उत्तीर्ण हुए साहित्यकार श्री डॉ गुलाब चंद पटेल

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इस्कॉन मंदिर अयोध्या द्वारा आयोजित ऑन लाइन गीता डिप्लोमा कोर्स 18 दिन दिनांक 2 जून 2021 से दिनांक 20 जून 2021 तक यू ट्यूब पर जीव जागो चैनल पर रोजाना एक घंटे तक 18 दिन चला था, जिसमें गांधीनगर के साहित्यकार एवं सामाजिक कार्य कर, अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर, अध्यक्ष गुजरात प्रदेश अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौ शाला अनुसंधान संस्थान नोएडा न्यू दिल्ली, और स्वर्णिम क्लब गांधी नगर के उपाध्यक्ष श्री डॉ गुलाब चंद पटेल जी ने हिस्सा लेकर संस्था के द्वारा आयोजित किया गया ऑन लाइन परिक्षा दी गई थी, जिसमें वे उत्तीर्ण हुए हे, संस्था ने इन्हें आज रोज़ टेली ग्राम पर प्रमाण पत्र दिया है,
यहां उल्लेखनीय है कि डॉ गुलाब चंद पटेल जी ने फ्रेंच भाषा का कोर्स आई आई टी गांधीनगर मे किया गया था और उसमे भी वे उत्तीर्ण हुए थे,
डॉ गुलाब चंद पटेल जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौ शाला अनुसंधान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य श्री ऋषि गौतम गुरुजी ने आशिर्वाद प्रदान किए गए हैं

डॉ गुलाब चंद पटेल
अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।