ग़ज़ल

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ajit raj
दिल में खार चुभा हो तो ग़ज़ल होती है
अलफ़ाज़ में लहू मिले तो ग़ज़ल होती है
दिल ऐ जज़्बात तो हर शख्स कह लेता है
उसमें भी कोयी बात हो तो ग़ज़ल होती है
सफ़र तो सभी करते हैं जिन्दगी का यार
जो मंज़िल की ख़बर हो तो ग़ज़ल होती है
हर ख़्वाब पूरा नहीं होता एक रात में
ख़्वाब अधूरा ही रहे तो ग़ज़ल होती है
हर ज़ख्म का शफा है जहाँ में ऐ ‘राज’
ज़ख्म जब नासूर बने तो ग़ज़ल होती है
#अजीत ‘राज’
परिचय : अजीत राज
पता          — बीकानेर, राजस्थान
सम्मान      —- 
नगर निगम द्वारा साहित्य सम्मान 
नगर निगम द्वारा रंग सम्मान
बीकानेर थियेटर एसोसिएशन द्वारा रंग सम्मान
स्थानीय संस्थाओं द्वारा सम्मान
उत्तर भारतीय हिन्दी साहित्य परिषद, देहरादून द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
अमृतधारा ऑर्गेनाइजेशन, जलगाँव द्वारा अमृतादित्य साहित्य सम्मान
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।