एक भी टीका खराब ना हो

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समस्त टीकाकरण केंद्रों पर प्रभारियों को टीकाकरण हेतु 1 बैकअप लिस्ट बनाकर रखना चाहिए जिसमें टीका लगवाने वाले ऐसे फ्रंटलाइन वर्कर, समाजसेवी, पत्रकार, युवाओं के नाम व मोबाइल नम्बर हो। जैसा कि हम जानते है, वैक्सीन का 1 डोज़ निकलने पर 10 लोगों को वैक्सीन लग सकती है। यदि दिवस के अंत में टीकाकरण हेतु पूरे 10 लोग नही बचते, तो ऐसे में बची हुई वैक्सीन खराब हो सकती है, क्योंकि उसे दूसरे दिन उपयोग नही किया जा सकता। इस संबन्ध में प्रत्येक टीकाकरण केंद्र पर एक बैकअप लिस्ट बनाकर रखना चाहिए, और टीकाकरण अधिकारी वैक्सीन शेष रहने पर 30 मिनट पहले उक्त लिस्ट प्रभारी को वैक्सीन बचने की सूचना दे, ताकि 30 मिनट में शेष बचे लोगों को बैकअप लिस्ट के माध्यम से बुलाकर टीका लगाया जा सके। इससे वैक्सीन का एक भी टीका खराब नही होगा। जैसा कि कई केंद्रों से टिका खराब होने की खबर आ रही है। पूरे देश मे कुल मिलाकर 45 लाख वैक्सीन डोज़ खराब हो चुके है, जिसमें आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छतीसगढ़ सबसे आगे है। मध्यप्रदेश में भी 81000 से अधिक वैक्सीन डोज़ खराब हुए, जो चिंता का कारण है। यदि जनता व अधिकारी दोनों वेक्सिनेशन के लिए जागरूक बने तो वैक्सीन का बर्बाद होना रोका जा सकता है।

मंगलेश सोनी
मनावर मध्यप्रदेश

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जीवन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।