प्यारा भारत देश

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हमारा है प्यारा बहुत देश
जिसमें रहते हर धर्म के लोग
ये हमारा हिंदुस्तान है..।
जिसमें बसते सबके प्राण
तभी तो करते सब प्यार
ये हमारा हिंदुस्तान है..।।

जहाँ अनेकता में एकता
नजर आती है सदा
ये हमारा हिंदुस्तान है..।
मनाये मिलकर हर त्यौहार
चाहे हो वो होली दीपाली
ईद या हो किस्मस।
ये हमारा हिंदुस्तान है..।
तभी पूरा विश्व आज
मानता है भारत को आज।
ये हमारा हिंदुस्तान है..।

मुसीबत जब भी इस पर आई
किया मुकाबला सबने मिलकर।
चटा दी धूल दुश्मनो को
हमारी एकजुटता ने ही।
नहीं होने दिया उन्हें कामयाब।
हरा दिया उन सबको
ये हमारा हिंदुस्तान है..।

नहीं बांटो इस देश को
धर्म जाती के आधार पर
ये हमारा हिंदुस्तान है..।
जहाँ पर जन्म लिए हो
84 हजार देवी देवताओ ने।
और दिखाई अपनी अपनी
लीलाएं यहाँ पर।
तभी तो पवित्र देश इसे
कहते है विश्व के सारे लोग।
ये हमारा हिंदुस्तान है..।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।