मध्यमवर्गियों का दर्द

Read Time0Seconds

सोच सोच कर रो रहा हूँ
अपनी करनी पर।
कैसा वक्त आन पड़ा
अब सबको रोने को।
चारो ओर मची है
अब मंहगाई की मार ।
फिर भी कहते थक नहीं रहे
अच्छे दिन आगये इस बार।।

कहा से चले थे
कहा तक आ पहुंचे।
क्या इससे भी ज्यादा
अच्छे दिन अब आयेंगे।
जब मध्यमवर्गी लोगों को
घर में भूखे ही मरवायेंगे।
वैसे भी कौन करता परवाह
इन मध्यमवर्गी परिवारों की।
न तो वोट बैंक होते है ये
और न होते है आंदोलनकारी।
फिर क्यों करे चिंता सरकारे
मध्यमवर्गी परिवारों की।।

फंड मिलता है अमीरो से
और वोट मिले गरीबों से।
हाँ पर टैक्स सबसे ज्यादा देते
ये ही मध्यमवर्गी परिवार।
जिस पर यश आराम और
राज करती है देश की सरकारें।
सबसे ज्यादा अच्छे दिनों में
लूट रहे मध्यमवर्गी परिवार।
जाॅब चलेंगे नये नहीं है
और हुए युवा देश के बेकार।
फिर भी अच्छे दिन कहते-२
थक नहीं रही देश की सरकार।
हाय हाय अच्छे दिन
हाय हाय अच्छे दिन
लेकर आ गई जो सरकार।।

राम नाम की लूट है
लूट सके तो लूट।
अब आगे किसने देखा है
ये मौका न जाये चूक।
जितना शोषण हो रहा
मध्यमवर्गी परिवारों का।
इतना पहले नहीं किया
पहले की सरकारो ने।
मध्यमवर्गी परिवारों का
फंड लूटा रहे अमीरो को।
और मुफ्त में बांटे जा रहे
वोटो की खातिर गरीबों में।
पर कृपा दृष्टि नहीं होती
इन मध्यमवर्गी परिवारों पर।
कुछ तो अब शरम करो
अपनी कहनी करनी पर।
कबतक जुमले छोड़ते रहोंगे
सत्ता में बने रहने को।
क्या कहकर सत्ता में आये थे
और कबतक सत्ता में रहोंगे।
प्रजातंत्र में अपनी करनी का
फल तुम भी आगे भोगोगे।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

0 0

matruadmin

Next Post

मरहम

Sat Feb 27 , 2021
पुलवामा के घावों पर, मरहम आज लगाया था। वायुसेना के वीरों ने , बालाकोट उड़ाया था। गद्दारों की बर्बादी को, गुपचुप जाल बिछाया था। एयर स्ट्राइक करने का, वीरों ने प्लान बनाया था। भारत माँ के सपूतों ने, दुश्मन को मजा चखाया था। बारह दिन के अंदर ही, गद्दारों का […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।