वर्तमान

Read Time2Seconds

(१)
बिना सीखे आप साइकिल की पंचर तक नहीं बना सकते हैं लेकिन किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर लंबी-लंबी छोड़ सकते हैं। 
(२)
कौन किस मुद्दे का समर्थन या विरोध करेगा इसके लिए ये बिल्कुल ही गैर जरूरी है कि वो हितकर है या अहितकर देखने वाली बात सिर्फ ये है कि वो किस धड़े का है।
(३)
पत्नियां पति से, सास बहू से, कर्मचारी अधिकारी से और जनता सरकार से हमेशा नाराज ही रहती है।
(४)
 पुलिस नेता और कुत्ता ये ऐसे जीव हैं जिसे कोई भी गाली दे सकता है। 
(५)
सरकार समर्थक और पति ये दोनों ऐसे सर्वनाम हैं जिन्हें हमेशा तुच्छ नजरों से ही देखा जाता है। 
(६)
गरीब, दलित और महिला हमेशा प्रताड़ित ही होती है। 
(७)
भक्त और मोदी का आपस में वही संबंध है जो एडविना आंटी का चाचा नेहरू से। 
सब अच्छा है बरगद में
पर एक बुराई तो है ही
कि वो अपने नीचे दूसरे को पनपने नहीं देता
(८)
दवाएं डालिये
निराई करिए
गुड़ाई करिए
पर खर पतवार कभी समाप्त नहीं होंगे
(९)
‘है’ और ‘नहीं है’ के 
दिमागी उठक बैठक के बीच
‘भगवान’ किसी चूल्हे पर चढ़ी हुई वह खाली हांडी है जिसके भरोसे कोई मजबूर माँ 
अपने भूखे बच्चे को सुला सकती है। 
(१०)
समाधि की चाहत में जल्दबाजी करने वाला नशे की लत का शिकार हो जाता है।
और अध्यात्म को धंधा बनाने वाला आशाराम!
(११)
आस्था के आशाराम हो जाने के लिए बेटी के बाप का अंधभक्त  का होना भी जरूरी है और सत्ता के निरंकुश होने के लिए जनता की अंधभक्ति!
(१२)
प्रेम करने के लिए दो दिलों की जरूरत होती है
और प्रेम को सफल बनाने के लिए एक अदद नौकरी की!
(१३)
कहानियां झूठ को सच की तरह कह देने का कलात्मक उदाहरण होती हैं और पत्रकारिता पानी में आग लगाने वालों का एक ब्यवस्थित तंत्र!
(१४)
दुनिया के 99 % लोग कर्मठी ईमानदार और प्रेम करने वाले हैं बाकी 1% लोग मेरे आसपास हैं। (ऐसा कई लोगों को लगता है)
(१५)
प्रेम का सुपात्र ढूढ़ते ढूढ़ते जब तक वह मिलता है तब तक ब्यक्ति ख़ुद कुपात्र हो जाता है।
(१६)
कुंआ कितना भी छोटा हो लेकिन उसमें मेढ़क बहुत बड़े बड़े रहते हैं।

#दिवाकर पांडे

0 0

matruadmin

Next Post

सद्कर्म

Sat Feb 20 , 2021
जो भी कर्म हम कर रहे उसे समझ लें हम यार परमात्म आँख देख रही खड़ी हमे उस पार आत्मा को जो अच्छा लगे ऐसा सदकर्म करे हर बार तभी हमें मिल सकेगा परम् पिता का प्यार कोई जगह ऐसी नही है जिस पर न पड़ सके परमात्मा की नजर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।