देश के 74वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर साहित्य संगम संस्थान ने स्थापित की अपनी पंद्रहवीं राज्य इकाई : उड़ीसा

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राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मिथलेश सिंह मिलिंद नई दिल्ली :

आज के कार्यक्रम में भव्य छंदोत्सव/गणतंत्रोत्सव का आयोजन, नौ पुस्तकों का विमोचन, मनोनयन, सम्मान वितरण व इकाई का उद्धाटन समारोह बहुत ही भव्य तरीके से हुआ सम्पन्न, जिसमें देश के विविध प्रांतों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हिमाचल, उड़ीसा और अन्य कई राज्यों से करीब सौ नामचीन व नवोदित साहित्यकारों ने भाग लिया जो वाकई में नायाब रहा।

साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में संस्थान की उड़ीसा इकाई का उद्घाटन समारोह आज गणतंत्र दिवस के पावन पर्व 26 जनवरी 2021 को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक भव्य आनलाइन छंदोत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार संगम सवेरा के प्रधान संपादक आ. नवलकिशोर सिंह जी द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आ. डॉ राकेश सक्सेना जी, विशिष्ट अतिथि आ. कुसुम लता कुसुम जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष आ. राजवीर सिंह मंत्र जी, सह अध्यक्ष आ कुमार रोहित रोज़ जी, कार्यक्रम का संचालन व संयोजन “नई उमंग समिति” के अंतर्गत रोहित कुमार रोज़, मिथलेश सिंह मिलिंद, विनोद वर्मा दुर्गेश जी, अर्चना पाण्डेय जी, वंदना नामदेव जी, अर्चना तिवारी जी, सरिता त्रिपाठी जी, ज्योति सिन्हा जी, जयश्रीकांत जी, सुनीता जौहरी जी, भारती यादव जी द्वारा बखूबी अंजाम दिया गया। संस्थान की उड़ीसा इकाई उद्घाटन समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग सौ ज्येष्ठ-श्रेष्ठ कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने मनमोहक छंद बद्ध काव्यपाठ से समारोह को ऐतिहासिक व यादगार बना दिया और संस्थान के द्वारा हिंदी साहित्य के विकास में सहयोगी हर एक ऐतिहासिक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए, संस्थान को ढेरों बधाइयाँ भी दी। कार्यक्रम की सफलतम समाप्ति के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह मंत्र जी ने कार्यक्रम में शामिल सभी कवियों को हार्दिक धन्यवाद कहते हुए, सभी शायरों/कवियों को “उत्कल उत्कर्ष” की उपाधि से विभूषित किया। इस कार्यक्रम में एक साथ संस्थान की नौ पुस्तकों का विमोचन किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है, जो अब तक की साहित्य मीडिया जगत में सबसे बड़ी व अहम उपलब्धि है। कार्यक्रम में प्रस्तुत छंद बद्ध रचनाओं को संकलित कर छंदमेध पुस्तक बनाने की पहल भी साहित्यिक दृष्टिकोण से कल्याणकारी व शिक्षाप्रद है। संस्थान द्वारा अब तक पांच उत्कृष्ट कोटि की छंदमेध पुस्तकों का विमोचन किया जा चुका है, जो साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक सभी दृष्टियों से कल्याणकारी भाव प्रेषित करने में पूर्ण सहयोगी होगी, ऐसा पूर्ण विश्वास है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।