सर्द हवाएं

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सर्द हवाएं सर्दी की,
तन मन को बहुत सताती हैं।
डर जाती हैं अमीरों से,
गरीबों को आँख दिखाती हैं।

ना पैरों में जूते ,चप्पल,
ना ही मोजों की जोड़ी है।
ना तन पर हैं ऊनी कपड़े,
ना ही सर पे टोपी है।

ना कम्बल है ना है रजाई,
ना मखमली बिछावन है।
बेबसी में बेबस लोगों का,
क्या बसन्त क्या सावन है।

अलाव जला कूड़े कचरे से,
सर्दी से राहत पाते हैं,
ऐसी भीषण सर्दी में जाने,
कैसे गरीब सो पाते हैं?

सर्द हवा के सर्द थपेड़े,
तन पर कोड़े बरसाते हैं।
ऐसे में मेघा काले देख,
बेबस बहुत थर्राते हैं।

फ़टे पुराने चीथड़ों से,
ये अपना तन छुपाते हैं।
छोटी छोटी खुशियों से,
अपने को धन्य बनाते हैं।

अपनों का पेट भरने को,
दिन रात ये मेहनत करते हैं।
कोहरे की मोटी चादर ओढ़,
ये घर से रोज निकलते हैं।

मिले ना जब काम कोई,
तो भूखे ही सो जाते हैं।
लेकर कल आस बेचारे,
किस्मत कोस रह जाते हैं।

आओ हम सब मिलकर,
मानवता का धर्म निभाएं।
बेबसी में बेबस लोगों का,
जीवन खुशहाल बनाएं।

स्वरचित
सपना (स. अ.)
जनपद-औरैया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।