इक दीप

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आओ इस दीवाली एक दीप नया जलाए
समाज में व्याप्त बुराइयों को जलाकर भगाएं
इस बार हम मिट्टी के ही दीप जलाए
भारतीयता का परचम इस जग में लहराये
राम लला जब बुराई को हराकर घर पर आए
जब ही सब ने सुंदर सुसज्जित दीप सजाए थे।
इस बार कुम्हार से दीप ले हर जगह जलाएगें
हर घर में खुशियों के लिए लाखों दीप सजाएं।
इक दीप नारी के सम्मान के लिए भी जलाए ।
गौ माता की रक्षा के लिए सुंदर दीपमाला बनाए।
एक ऐसा दीप जलाए,जो सैनिकों का यश दसो दिशायो में गुंजाए।
जो वीर शहीदों का मान बढ़ाकर गुणगान कर जाए।
इक सुंदर सा दीप जलाकर किसानों का मान बढाएं
अन्नदाता पर इस त्योहार हजारों खुशियां न्योछावर हो जाए ।
इक दीप ऐसा हो जो शोले सा दहकता हो,
दुश्मन की आंखो मै खूब चुभता , चहकता हो।
इक दीपक का तेज अति निराला हो।
हर गरीब के तन पर कपड़े , मन में खुशियां ,
मुंह में निवाला हो।
सब पर मां लक्ष्मी की माया हो , कुबेर की छत्रछाया हो,
विघ्न हरने वाले हर घर में विघ्न विनायक हो।
आओ इस दीवाली दीवाली दीप नया…………..।
इक दीपक ऐसा जलाए गुरु के चरणों में शीश नवाए
ज्ञान का दीप नया जलाए।
आओ इक दीपक शिव के नाम का भी जलाए
शिव के धाम पर दीपमाला सजाएं, शिव के चरणों में नित नित शीश निवाए ।
अनिल कुमार मारवाल
हनुमानगढ़ (राजस्थान)

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।