सांसों की सरगम

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सांसों की सरगम,
दिल की ये धड़कन,
सुनाए मधुर गीत प्यारा।
जाने कहां कब कैसे किधर ये,
रुक जाए जीवन की धारा।
सांसों की सरगम……..
आए हो जग में ,
तो कुछ कर के जाओ,
ना गवाओ यूं जीवन सारा।
एक बार ही मिलता है ये जीवन
ना मिलेगा ये दोबारा।
सांसों की सरगम…….
बन जाओ किसी के
जीवनसाथी ,
बन जाओ किसी के यारा।
जिनका नहीं है कोई जग में,
बन जाओ उनका सहरा।
सांसों की सरगम……
दीन दुखियों के ,
गरीबों लाचारों के,
जीवन में लाओ बहारा।
अज्ञानता की अंधेरी गलियों में,
फैलाओ ज्ञान का उजाला।
सांसों की सरगम……
तन मन धन से,
और लगन से ,
काज करो कुछ न्यारा।
एक ना एक दिन चमकोगे जग में
बनके गगन में सितारा।
सांसों की सरगम………
ईर्ष्या द्वेष से,
लालच मोह से,
कर लो इनसे किनारा
प्रेम दया और करुणा से
खुशियों से महकेगा जीवन सारा।
सांसों की सरगम…….
अपने लिए तो,
दुनियां है जीती,
बन जाओ औरों का भी सहारा।
लाख दुआएं मिलेगी तुझको,
झूमेगा तन मन सारा।
सांसों की सरगम…….

रचना – सपना
जनपद – औरैया

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इस बात का डर है, वो कहीँ रूठ न जायेंI नाजुक से है अरमान मेरे, कही टूट न जायें।। फूलों से भी नाजुक है, उनके होठों की नरमी I सूरज झुलस जाये, ऐसी सांसों की गरमी I इस हुस्न की मस्ती को, कोई लूट न जाये I इस बात का […]

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।