श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पद्यानुवाद(प्रथम अध्याय)

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ranjana
व्यास जी बोले-
एक दिवस नैमिष निर्जन में। 
शौनकादि ऋषि बैठे वन मेंll 
चिंतित जग की दशा निहारें। 
तभी  सूत जी  वहाँ  पधारेll 
लगे पूछने सब मिल उन से। 
वांछित फल मिलता किस व्रत सेll 
कहा   सूत ने   नारद ने  भी। 
पूछा  कमलापति  से  यह  हीll 
प्रभु ने था जो  उन्हें  बताया। 
वही  आज  है  मैंने  गायाll 
एक बार नारद  मुनि  ज्ञानी। 
करतल  बीन  राममय  बानीll 
भ्रमण कर रहे लोक-लोक में।
देखा  मानव  पड़ा  शोक मेंll
मृत्यु-लोक में  दुख है भारी। 
कर्म  भोग भोगें  नर  नारीll 
कैसे  कष्ट   दूर  हो  इन  का।
यही एक चिंतन था मन काll 
विष्णु लोक वे पहुँचे जाकर।
रूप  चतुर्भुज  देखा  सुंदरll 
शंख  चक्र  पंकज  वनमाला।
गदा हाथ उर बाहु विशालाll 
विनय करें नारद मुनि ज्ञानी।  
मनातीत चित् रूप अमानीll 
निर्गुण गुणी अनादि अनन्ता।
गान करें शारद श्रुति सन्ताll 
 
आदि भूत आरतिहर स्वामी।
नमन  तुम्हें   हे  अंतर्यामीll 
बोले  श्री  हरि  जगदाधारा।
किस कारण आगमन तुम्हाराll 
शंका इच्छा हो  जो  मन में।
करूँ निवारण उस का क्षण मेंll 
नारद बोले मृत्यु-लोक  में।
सारे  प्राणी  पड़े  शोक  मेंll 
नाना   योनी   नानाकारा।
कर्म-भोग  भोगे  जग साराll 
भूतल  पर  हैं  नाना  रोगा।
कैसे  शमन  कष्ट  का  होगाll 
लघु उपाय  कोई  बतलायें। 
जिससे सभी सुखी हो जायेंll 
बोले हरि सुनिये मुनि नारद।
परहित तत्पर वाक्य विशारदll 
जो करके सब  सुखी रहेंगे।
हम  उपाय  अब  वही  कहेंगेll
स्वर्ग मर्त्य  दोनों  में  दुर्लभ।
यह व्रत हो सब भक्तों को लभll 
सत्यनारायण का यह व्रत है।
इसको  करने  में जो  रत हैll
सुख सम्पत्ति सभी सुख पाता।
मरने  बाद  मुक्त हो  जाताll 
यह सुनकर नारद जी बोले।
कृपासिन्धु अब रहस्य खोलेंll 
क्या फल क्या विधान है इसका।  
करके भला हुआ है किसकाll 
यह सब विधि प्रभु आप बतावें।  
कब व्रत करें यही समझावेंll 
बोले  हरि   दुख  कष्ट  मिटेगा।  
अन धन जग में मान बढ़ेगाll 
सम्पति औ सौभाग्य प्रदाता।  
यह व्रत जय अरु सन्तति दाताll  
 
जिस दिन मन में श्रद्धा जागे। 
उसी दिवस हो प्रभु के आगेll 
सत्य नारायण का आवाहन।  
बन्धु बांधवों युत हो वन्दनll
नत  मस्तक  नैवेद्य  चढ़ावे।  
केला  घी  अरु  दूध  मंगावेll 
गेहूँ  या  चावल  पंजीरी।  
गुड़  या  चीनी  या  हो  बूरीll 
भक्ति प्रेम से पूजन करके।  
कथा सुने ब्राह्मण को वर केll 
विप्र बन्धु सब भोग लगावेl  
प्रेम सहित भोजन करवावेll 
दे दक्षिणा प्रेम से उनको।
शांति प्राप्त हो जावे मन कोll 
खा प्रसाद सब नाचें गायें।  
तदुपरांत  अपने  घर  जायेंll 
इससे  इच्छा  होगी  पूरी।  
दुख-विपत्ति  से  होगी  दूरीll
नाम मिटा देता जो दुख का। 
लघु उपाय है यह कलयुग काll

                                                                                   #डॉ. रंजना वर्मा

परिचय : डॉ. रंजना वर्मा का जन्म १५  जनवरी १९५२ का है और आप फैज़ाबाद(उ.प्र.) के मुगलपुरा(हैदरगंज वार्ड) की मूल निवासी हैंl आप वर्तमान में  पूना के हिन्जेवाड़ी स्थित मरुंजी विलेज( महाराष्ट्र)में आसीन हैंl आप लेखन में नवगीत अधिक रचती हैंl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।