दास्तांं ए हिंदी*

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हिंदी बोली आज तुम औपचारिकता को निभा लो
लिखो हिंदी भाषा में आज कविताओं को सजा लो
एक फीकी हंसी लिए न जाने फिर हंसने लगी हिंदी
जाने दो मत एक दिन के लिए मुझे इतना सम्मानदो

बरसों बीते आजाद हुए मेरे मुल्क मेरे ही हिंदुस्तां को
अंग्रेजी खा रही है आज भी मेरे हिन्दी के गुलिस्तां को
अब तो अपने मुल्क में मैं मेहमान सी ख़ुद को पाती हूं
बस अब हिंदी दिवस के रूप में तारीख में छप जाती हूं

हिंदी बोली आज तुम भी औपचारिकता को निभा लो
लिखो हिंदी भाषा में आज तुम कविताओं को सजा लो

कटघरे में हूं खड़ी ना वकील है ना कानून मेरे साथ हैं
होने लगा है अब तो मुझे भी मेरी मौत का एहसास है
मत करो यूं कत्लेआम मेरा नहीं किसी की गुनहगार हूं
तड़प रही हूं आज इतना मातृभूमि से मांगती इंसाफ हूं

हिंदी बोली सुन मेरी व्यथा गर तुम सब हुए शर्मसार हो
दे दो अंग्रेजी को आहुति हिंदी मात्रृभाषा को सत्कार दो
लो संकल्प फिर कहो हिंदी हमारी पहचान हमारा गर्व है
उठाओ अपनी कलम हिंदी लिखकर हर पन्ना संवार लो

हिंदी बोली आज औपचारिकता से छुटकारा पा ही लो
लिखो हिंदी भाषा में अपनी कविताओं को तुमसजा लो

डेज़ी बेदी जुनेजा।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।