हवाओ से…..

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ठंडी हवाओ के झोंको से
आ रही फूलों की महक।
चिड़ियों की चहको से
मिल गया आपका संदेश।
दुआ करते है ईश्वर से
की हमें मिलता रहे।
आपका जैसे दोस्त का
स्नेह और प्यार।।

दूर है दोनों के किनारे
पर दिल से एक है।
मिलना मिलाना हो जाएगा,
यदि जिंदगी बची रही तो।
इसलिए संजय कहता है
इच्छा शक्ति को जिंदा रखेंगे।
तो अपने मित्र से आपकी
मुलाकात हो जाएगी।।

कही दीप जल रहे है
तो कही छाय पढ़ रही है।
कही दिन निकल रहा है
तो कही रात हो रही है।
मोहब्बत करने वालो को
इन सब से क्या लेना देना।
क्योंकि दोनों के दिल
दिल से मिल गये है।।

दिया तले अंधेरा है जो
रोशन को तलाशता है।
और हर रोज नई
उम्मीदे लेकर आता है।
शायद कोई रोशनी की
किरण दिख जाये।
और अंतरात्मा में कोई
कमल खिल जाए।।

दिल को छू जाए रचना
वो अच्छी होती है।
प्यार अपनो का मिल जाये
वो ही रचना सच्चा होती है।
क्योंकि ऐसी रचनाएं
काल्पनिक नहीं होती।
ये तो दिल से निकालकर
दिलो तक पहुंच जाती है।।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन मुम्बई

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।