हवाओ से…..

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ठंडी हवाओ के झोंको से
आ रही फूलों की महक।
चिड़ियों की चहको से
मिल गया आपका संदेश।
दुआ करते है ईश्वर से
की हमें मिलता रहे।
आपका जैसे दोस्त का
स्नेह और प्यार।।

दूर है दोनों के किनारे
पर दिल से एक है।
मिलना मिलाना हो जाएगा,
यदि जिंदगी बची रही तो।
इसलिए संजय कहता है
इच्छा शक्ति को जिंदा रखेंगे।
तो अपने मित्र से आपकी
मुलाकात हो जाएगी।।

कही दीप जल रहे है
तो कही छाय पढ़ रही है।
कही दिन निकल रहा है
तो कही रात हो रही है।
मोहब्बत करने वालो को
इन सब से क्या लेना देना।
क्योंकि दोनों के दिल
दिल से मिल गये है।।

दिया तले अंधेरा है जो
रोशन को तलाशता है।
और हर रोज नई
उम्मीदे लेकर आता है।
शायद कोई रोशनी की
किरण दिख जाये।
और अंतरात्मा में कोई
कमल खिल जाए।।

दिल को छू जाए रचना
वो अच्छी होती है।
प्यार अपनो का मिल जाये
वो ही रचना सच्चा होती है।
क्योंकि ऐसी रचनाएं
काल्पनिक नहीं होती।
ये तो दिल से निकालकर
दिलो तक पहुंच जाती है।।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन मुम्बई

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।