दोस्ती

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एक शब्द नहीं , अर्थ है दोस्ती ।
खामोशी से सब जानने में, समर्थ है दोस्ती।

दोस्ती झील है, नदिया है, सागर है।
दोस्ती अमृत से भरा गागर है ।

दोस्ती नींद है,भूख है,प्यास है।
दोस्ती एक खूबसूरत एहसास है।

दोस्ती राधा है, कृष्ण है, सुदामा है।
दोस्ती दुर्योधन के साथ, कर्ण का जाना है।

दोस्ती चांद है, तारे है, सूरज है ।
दोस्ती ब्रह्माण्ड के सब टुकड़ों की मूरत है।

दोस्ती राम है, लक्ष्मण है, सीता है।
दोस्ती अर्जुन की भक्ति ,कृष्ण की गीता है।

दोस्ती ख्वाब है,जुनून है, तकरार है।
दोस्ती महफ़िल में जमी, दोस्तों की सरकार है।

दोस्ती मां है, पिता है, परिवार है।
दोस्ती एक धागे में बंधा बहन का प्यार है।

युगों युगों से जो चली आ रही,दोस्ती वह रीत है।
दोस्ती इस दुनिया का खूबसूरत संगीत है ।

हर किसी से नहीं की जाती, दोस्ती एक आशा है।
दोस्ती हर किसी के जीवन की परिभाषा है।

#मृत्युंजय सिसोदिया

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दोस्ती

Sun Aug 2 , 2020
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।