फिर से अपने बचपन को जिया जाए

Read Time1Second

asha bunkar

क्यों अभी से खुद को यूँ संजीदा किया जाए,
क्यूँ न फिर से अपने बचपन को जिया जाए..
चलो आज फिर एक गुड़िया का घर बनाएं,
और सजाएँ उसे फिर नन्हें सपनों के साथ..
फिर से कराएं वो गुड़िया की शादी,
 वो नकली घोड़े,वो नकली हाथी..
 वो नकली दूल्हा,वो नकली बाराती,
उन गुज़रे कीमती लम्हों को फिर से याद किया जाए
क्यों न आज फिर से बचपन को जिया जाएl
क्यों न बनाएं फिर कागज की कश्ती,
 और छोड़ें उसे ठहरे से पानी में..
माना दौड़ रही है ज़िन्दगी,
पर मोड़कर इसे गुजरी यादों का पीछा किया जाए,
क्यों न फिर से बचपन को जिया जाएl
क्यों न आज लेकर उमंग भरी मिटटी,
बनाएं खिलौने कुछ मासूम ख्वाहिशों के..
यूँ तो फ़िज़ूल है भागना ख्वाहिशों के पीछे पर,
क्यों न ज़िन्दगी को एक और मौका दिया जाए..
क्यों न फिर से अपने बचपन को जिया जाएl
वो बारिश में भीगना,
वो दौड़ना नंगे पैर रास्तों पे..
वो नहाना खुली सड़क पे,
वो महसूस करना बारिश की हर बूँद को..
माना बहुत बंदिशें हैं आज ज़िन्दगी में,
पर क्यों न कुछ पल के लिए खुद को आज़ाद किया जाए..
क्यों न अपने बचपन को जिया जाएl
बड़ी भीड़ है ज़िन्दगी में,
कुछ उम्मीदें,कुछ ख्वाहिशें और कुछ हसरतें..
सोचती हूँ आज ज़िन्दगी को कुछ खाली किया जाए,
तो आओ आज ही से अपने बचपन को जिया जाए।

                                                                             #आशा बुनकर

परिचय : आशा बुनकर का राजस्थान के जमनापुरी(जयपुर)में निवास हैl १९८३ में जन्मीं हैं और जयपुर से शिक्षा बीएड तथा स्नातकोत्तर(हिन्दी साहित्य) सहित  हिन्दी साहित्य में ही `नेट` उत्तीर्ण हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

असलियत

Fri May 12 , 2017
दुविधाओं से घिरा हुआ.. आंखों को मलता हुआ धीरे-धीरे जागता हुआ, खुद को भारतीय करार करता हूँ… अपने जीवन में एक मुद्दे पर दो राय रखता हूँ..l जब मैं आदमी हूँ तो अपने घर की, नारी को अबला एवं कल्पनाओं में सबला करार करता हूँ… पिता हूँ तो अपने पुत्र […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।