अगर नर और नारी ना होते

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अगर नर और नारी ना होते,
विश्व में इतनी आबादी ना होती।
बेचारी किसी भी सरकार को ,
इतनी समस्याएं भी ना होती।।

अगर आबादी इतनी ना होती,
बेरोजगारी की समस्या ना होती।
सरकार कितनी भी कोशिश करें
पर कभी समस्या हल ना होती।।

अगर आदमी बूढ़ा ना होता,
वह सदा जवान बना रहता।
व्याभिचार इतना बढ़ जाता,
आदमी कल्पना ना कर पाता।।

अगर नज़रे मिली ना होती,
कभी इतना इश्क ना होता।
जब इतना इश्क ना होता,
दिल से दिल मिला ना होता।

अगर आग लगी ना होती,
कभी इतना धुआं ना होता।
बाजार में तेरे मेरे प्यार का,
कभी इतना जिकर ना होता।।

अगर आज मोबाईल ना होता,
इतना सोशल मीडिया ना होता।
केवल उंगलियां चलाकर ही,
घर बैठे इतना चैट ना होता।।

अगर चीन मै कोरोना ना होता,
इतनी महामारी कभी ना होती।
अगर बन नाती इसकी वैक्सीन,
संसार में इतनी मौत ना होती।।

अगर वोट व वोटर ना होते,
देश में इतने नेता ना होते।
अगर मुक्त हो जाए देश इनसे
भारत में इतने घोटाले ना होते।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।