अगर नर और नारी ना होते

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अगर नर और नारी ना होते,
विश्व में इतनी आबादी ना होती।
बेचारी किसी भी सरकार को ,
इतनी समस्याएं भी ना होती।।

अगर आबादी इतनी ना होती,
बेरोजगारी की समस्या ना होती।
सरकार कितनी भी कोशिश करें
पर कभी समस्या हल ना होती।।

अगर आदमी बूढ़ा ना होता,
वह सदा जवान बना रहता।
व्याभिचार इतना बढ़ जाता,
आदमी कल्पना ना कर पाता।।

अगर नज़रे मिली ना होती,
कभी इतना इश्क ना होता।
जब इतना इश्क ना होता,
दिल से दिल मिला ना होता।

अगर आग लगी ना होती,
कभी इतना धुआं ना होता।
बाजार में तेरे मेरे प्यार का,
कभी इतना जिकर ना होता।।

अगर आज मोबाईल ना होता,
इतना सोशल मीडिया ना होता।
केवल उंगलियां चलाकर ही,
घर बैठे इतना चैट ना होता।।

अगर चीन मै कोरोना ना होता,
इतनी महामारी कभी ना होती।
अगर बन नाती इसकी वैक्सीन,
संसार में इतनी मौत ना होती।।

अगर वोट व वोटर ना होते,
देश में इतने नेता ना होते।
अगर मुक्त हो जाए देश इनसे
भारत में इतने घोटाले ना होते।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।