किसी पर तो आएगा

Read Time0Seconds

न दिल की प्यास,
मेरी बुझती है।
न दिल को,
चैन मिलता है।
पर न जाने,
क्यों तुम्हारी यादे।
इस दिल से,
जाती नही है।।

कदम कदम पर,
तुम याद आते हो।
दिलकी गैहराइयो में,
क्यो समाये हो।
क्या रिश्ता है,
तेरा और मेरा।
एक बार सामाने,
आके बताओ तो तुम।।

कसम उस खुदा की,
जिसने तुझे बनाया।
और मोहब्बत को जगाने,
मेरे दिलमें क्यों आये।
दिलमें बसा लूंगा तुम्हें,
रानी बनाकर रख लूंगा।
पर ये तभी संभव है,
जब तुम सामाने आओगे।।

कब किससे कहाँ पर,
प्यार हो जाये।
और मोहब्बत का,
अंकुर पनाप जाए।
दिल है हमारा यारो,
किसी पर तो आएगा।
तो वो आप क्यों,
नही हो सकते हो।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

0 0

matruadmin

Next Post

सोच

Mon Jun 15 , 2020
आप जैसा सोचोगे वैसा ही हो जाएगा आपका हर काम मन माफिक हो जाएगा दिल से ईर्ष्या -कपट बस, निकाल दीजिए सबका हो भला यह दुआ कीजिए जो सबके भले में अपना भला सोचता है वही जीवन मे मंजिल की ओर बढ़ता है प्रभु भी उसी के साथ है जिसके […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।