स्वदेशी उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मूल मंत्र क्या हैं?

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 स्वदेशी उत्पादन का हाल यह है कि मछली पैदा करने की प्रार्थना करो तो उसमें 'जांज' का फंडा उत्पन्न हो जाता है। जिसे विडम्बना न कहें तो और क्या कहें। क्या जांच उत्पादन से भारत आत्मनिर्भर बनेंगा? क्या मूल मुद्दे से हटने पर आत्मनिर्भरता आएगी?
  जांच पड़ताल की समय सीमा पहले एक सप्ताह, फिर एक माह, और फिर वर्ष पर वर्ष गुजर जाता है और पूरा  जीवन जांच में व्यतीत हो जाता। किन्तु जांच पूरी नहीं होती और विकास धरा का धरा रह जाता है।
 स्वदेशी उत्पादन के लिए विदेशी भ्रष्ट सिस्टम को तिलांजलि देनी अनिवार्य होनी चाहिए। स्वदेशी उपजाऊ भावनाओं और संवेदनाओं की जड़ों को भारत, भारतीय और भारतीयता की पवित्रता से सींचने की अति आवश्यकता है।
जबकि इसके लिए भारत के लोकप्रिय शिरोमणि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी ने 'लोकल के लिए वोकल' बनने का आह्वान किया है और प्रत्येक स्थान या विपत्ति में साथ खड़े होने का विश्वास भी दिलाया है। जो भारत भारतीय और भारतीयता को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सरल मूल मंत्र है।
 यही नहीं उन्होंने ने इसके लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज उपलब्ध कराने की घोषणा भी कर रखी है। जो निस्संदेह स्वतंत्र भारत में पहला इतना बड़ा पैकेज है। जिससे भारत भारतीय और भारतीयता की आत्मनिर्भरता तय है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।