मोहब्बत ऐसी थी

Read Time2Seconds

मोहब्बत ऐसी थी की,
उनको बता न सके।
चोट दिल पे थी,
इसलिए दिखा न सके।
हम चाहते तो नहीं थे,
उनसे दूर होना।
मगर दूरी इतनी थी,
की हम मिटा न सके।।

ये बेवफा साँस लेने से,
तेरी याद आती है।
ये बेवफा साँस न लू ,
तो भी मेरी जान जाती है।
ये कैसे कहा दू की,
बस में साँस से जिन्दा हूँ।
ये साँस भी तो तेरी याद,
आने के बाद आती है।।

कभी कभी जिंदगी,
बहुत परेशान करती है।
बीती हुई यादो को,
भी ताजा करती है।
वो तो कभी हमारे,
हुए ही न थे।
फिर क्यों हमें अपनी,
यादो से रुलाते है।।

कभी हंसकर कभी रो कर,
हमें भी रुलाते है।
वो बार बार हमें अपनी,
याद दिलाते है।
ये कम वक्त,
दिल भी तो ऐसा है।
जो बिना जानने वाले,
को भी भूलता नहीं।।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

0 0

matruadmin

Next Post

हल्दीघाटी:

Tue May 26 , 2020
मन करता है गीत लिखूँ मैं, एक लिंग दीवाने पर। मातृ भूमि के रक्षक राणा, मेवाड़ी परवाने पर।।✍ १ चित्रांगद का दुर्ग लिखूँ जब, मौर्यवंश नि: सार हुआ। मेदपाट की पावन भू पर, बप्पा का अवतार हुआ। कीर्ति वंश बप्पा रावल के, मेवाड़ी पैमाने पर। मन करता है गीत लिखूँ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।