लॉकडाउन में शादी की झलक

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भेज रहे है प्रेम निमंत्रण,प्रियवर तुम्हे दिखावे को।
आ जाना न कभी भूल से,तुम यहां खाने को।।

लॉकडाउन देश में लगा हुआ है,बारात में कोई नहीं जाएगा।
दूल्हा केवल अकेला ही,दुल्हन को बाइक पर ले आयेगा।।

बनवाए है छप्पन भोग हमने,उसका टोकन तुम्हे मिल जाएगा।।
जिसकी जैसी चॉइस होगी,उसे पैक करवा कर ले जाएगा।।

बैंडबाजा नहीं बजेगा,केवल लाउड स्पीकर बज पायेगा।
घुड चढ़ी भी नहीं होगी,दूल्हा किसी के कंधे पर चढ़ जाएगा।।

दिया था हमने तुम्हे लिफाफा,तुम्हे भी लिफाफा देना होगा।
होगे जितने रुपए लिफाफे में,उसके अनुसार टोकन मिल जायेगा।।

अगर आ न सको किसी कारणवश,होम डिलीवरी का प्रोविजन होगा।
पर उसके लिए लिफाफे के साथ,होम डिलीवरी चार्ज देना होगा।।

रखना बरकरार ये व्यवहार,जब तक देश में लॉकडाउन रहेगा।
पालन करना होगा इन नियमो का,वरना परिणाम भुगतना होगा।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।