श्रीरामनवमीं उत्सव लाखों परिवारों में सम्पन्न, कोरोना लाकडाउन के दौरान सेवाकार्यों की गति बढ़ी

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नई दिल्ली|

सम्पूर्ण समाज को श्रीरामनवमी (दि. 2 अप्रैल) निमित्त विहिप ने अपने-अपने परिवार में ही श्रीराम जन्मोत्सव को उत्साह से मनाने का आवाहन किया था। “श्रीराम जय राम जय जय राम” इस विजय महामंत्र के जप के साथ, आरती, श्रीरामचरित्र का चिंतन तथा श्रीराम जन्मभूमि के लिए बलिदान हुए लाखों हुतात्माओं का स्मरण करते हुए लाखों परिवारों में उत्साह से देशभर में श्रीराम नवमी का उत्सव सम्पन्न हुआ।

विश्व हिंदू परिषद पिछले अनेक दिनों से अपने देशव्यापी संगठन के माध्यम से कोरोना महामारी के इस संकट की घड़ी में बड़े प्रमाण में राहत के कार्य में लगी हुई है। दिनांक 26 मार्च से देश के प्रत्येक राज्य में हेल्पलाईन की सुविधा विहिप के माध्यम से प्रारंभ की गई है। हेल्प लाइन द्वारा 22,471 व्यक्तियों ने अभी तक संपर्क किया है। इन सारे व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने का प्रयास हुआ।

        समाज की रक्षा हेतु देशव्यापी अनिवार्य लाकडाउन के कारण से समाज को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक (दिनांक 08 अप्रैल तक) प्राप्त जानकारी के अनुसार 1,771 नगरों, 11,554 स्थानों के 2,89,827 परिवारों में भोजन सामग्री पहुंचाई, 18,65,699 व्यक्तियों को भोजन पैकेट वितरित किया, 3,38,282 व्यक्तियों को मास्क वितरित किया, 1,36,442 व्यक्तियों को सैनिटाइजर, दवाइयां वितरित की, 27,103 कार्यकर्ताओं ने इस सेवा कार्य में भाग लिया। यह सारी सेवाएँ परिषद के कार्यकर्ताओं ने सामाजिक दूरी (Social Distence) का पालन करते हुए कर रहे हैं।

        बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था, काम करने वाले सुरक्षाकर्मी तथा सफाई कर्मचारियों के लिए भोजन, पानी की व्यवस्था, अनेक शहरों में कई अस्पतालों में सभी मरीजों के प्रतिदिन की भोजन व्यवस्था ऐसे विविध प्रकार के कार्य समाज के अनेक मंदिर, सामाजिक, धार्मिक संस्थाएँ, गुरुद्वारे, देरासर (जैन मंदिर) इनके साथ मिलकर चल रहे हैं। अनेक राज्यों में हजारों प्रवासी मजदूरों को भोजन आदि की व्यवस्था अनेक दिनों से निरंतर चल रही है।

        उपरोक्त सारे सेवा कार्य प्रतिदिन चल रहे हैं और इस आपदा के पूर्ण निराकरण तक विहिप द्वारा समाज के सहयोग से चलाए जायेंगे।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।