मातृभाषा ने आयोजित किया ऑनलाइन कविसम्मेलन

0 0
Read Time2 Minute, 17 Second

इन्दौर।

देशव्यापी फैली हुई महामारी कोरोना के कारण पूरा देश लॉक डाउन से बंधा हुआ है, ऐसे में सृजन को घर बैठे जारी रखने के उद्देश्य से मातृभाषा.कॉम द्वारा शनिवार 11 अप्रैल 2020 को ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका संयोजन संस्था की संयोजिका दिल्ली निवासी भावना शर्मा ने किया।
इस कवि सम्मेलन में देशभर के करीब 18 कवि-कवयित्रियों ने भाग लिया जिनमें श्रीमती स्नेहलता रुड़की (उत्तराखंड) से, गाज़ियाबाद से मंजू बिष्ट , बांसवाडा से शास्त्री दीपक जैन ‘ध्रुव’ जी, डॉ मनिला कुमारी, भवानीमंडी से डॉ राजेश कुमार शर्मा, राजनांदगांव से अमिता दुबे, रायपुर से सीमा निगम, इंदौर से डॉ गरिमा मिश्र तोष, बालाघाट से नवनीता कटकवार, भोपाल से ओरिना अदा, भागलपुर से सुमन सोनी, बिलासपुर से रश्मिलता मिश्रा, ग़ाज़ियाबाद से नीरजा मेहता, दिल्ली से आस्था जैन, इंदौर से डॉ. वासिफ़ क़ाज़ी, मेरठ से सीमा गर्ग, सुन्हेल से आशारानी जैन एवं अहमदाबाद से डॉ. शैलजा एन भट्टड़ सम्मिलित हुए।
इन सभी रचनाकारों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं के वीडियो व्हाट्सएप्प समूह में नियत क्रम में प्रेषित किए।
हिन्दी प्रचार के लिए प्रतिबद्धता से कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रेषित किया गया।
कवि सम्मेलन को समूह के साथियों द्वारा लॉक डाउन का सदुपयोग बताते हुए सराहा गया एवं सभी श्रोताओं द्वारा कवियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

matruadmin

Next Post

यह रोग नहीं महामारी है |

Sat Apr 11 , 2020
यह रोग नहीं महामारी है | सब पर कर रहा सवारी है || इस पर कोई न सवार हुआ | यह प्रश्न बना हुआ भारी है || ये कैसा बुरा समय आया है | यह सारे संसार पर छाया है || सबने सारी शक्ति लगा दी है | फिर भी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।