कोरोना से करो ना मनमानी

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मंडरा रहा है अभी कोरोना मौत देखो हर शहर में..
जाने कौन, कब क्या हो जाये किसे किस पहर में…
कोरोना आफत लेकर फैला रही विषाक्त गरल में….
रहा पवन में पल पल घुल देखो नई जहर में ….

कोरोना क्या कम था जो अब आया ये हंता देखो……
रहे सचेत नही तो ले डूबेगा ये कोरोना और ये नया हंता……
कहा पता था इस धरा को इतना भयावह दिन भी आएगा……
कोरोना की बजह से पूरा विश्व को एक दिन यू रोना पड़ेगा…….

ऐसे में मिल जुल कर रहे घर परिवार में परिवारों के संग……
हर सदस्य मिल बाटे गृह कार्य ,सदा रखे सब अपना हर्षित मन ……
खेले घर मे ही इंडोर गेम संग लेकर बच्चो और बूढों के मन …..
सदा सकारात्मक सोच से बढ़ाये रखे अपना अपना इम्युनिटी पावर मन…….

वाह प्रकृति ने दीया मौका एकाकी से संयुक्त प्यार का पाने का……
बटोर ले अपने दामन में वो सपनो वाली सारी खुशियाँ……..
कहानी खिस्सो की सी बातें सच हो रही अभी सभी घरों में …..
माँ ने सर में तेल लगाया, नानी ने नतनी का दिया चोटी बांध……

कोरोना है एक खतरनाक बीमारी हल्के में इसे लेना पड़ेगा भारी…..
सोसल डिस्टेंसी आप बनाओ अपने मन की मत चलाओ….
सेहत के लिये दे रहे दुहाई 21 दिनों के लॉक डाउन की सब करो अगुवाई…….
आओ खाये सब मिल कसमें जाने न देगे ईस्वर जैसे, सैनिक, डॉ0, पुलिस, रक्षा , मीडिया व सफाई कर्मी की बलिदानो को हम सब मिल भाई …..

मोदी जी के निर्णय संग मिल कोरोना को परास्त कर हँसते हँसाते निकल जाएंगे……. करे सपरिवार घर मे ही पूजा पाढ़, और नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा …… कर आराधना शांत करें इन कोरोना नामक भयंकर तांडव को ……..
संयम बरते और ‘क’ ‘रो’ ‘ना’ मतलब कोई रोड पर न निकलना ….
हाँ जी हाँ है विनती आपसे कोई रोड पर न निकलना , जी ना निकलना …..

परिचय-
सुमन सोनी
ब्रांड एम्बेसडर यूथ इंडिया बिहार भागलपुर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।