लेख-जय हो व्हाट्सएप महादेवा*

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आज की दुनिया व्हाट्सएप की दुनिया हैं। हर चीज व्हाट्सएप पर उपलब्ध होनी चाहिए। कोई भी काम पड़ता है तो तुरंत व्हाट्सएप को याद किया जाता है। आज व्हाट्सएप भगवान के बराबर है। कई लोगों की तो जिंदगी ही बदल गई। कई लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला। कई लोगों को व्यापार में बहुत सुविधा हुई। सब लोगों को कुछ ना कुछ फायदा हुआ है व्हाट्सएप से। कुछ लोगों ने गलत फायदा भी उठाया तो कइयों ने इसका सही और वैध तरीके से काम लेकर अपनी पहचान भी बनाई है। आजकल लोग व्हाट्सएप पर इतना समय व्यतीत कर देते हैं कि उनको पता ही नहीं रहता। जब भी फुर्सत मिलती है तो तुरन्त व्हाट्सप चेक करके देखते है कि किसी ने कुछ भेजा है क्या? मिनट – मिनट में चेक करते हैं। जब भी रात को नींद खुलती है चाहे कितने भी बज रहे हो ,अधिकांश लोग उठकर व्हाट्सप चेक करते ही है। बनाने वाले ने तो इसको किसी अच्छे उप्योह हेतु बनाया था पर लोग ना जाने किन किन तरीकों से इसका इस्तेमाल करने लग गए है । आज कुछ लोग खाने के बिना रह सकते है पर व्हाट्सप के बिना नहीं रह सकते। जय व्हाट्सप महादेवा अब तो आप ही मेरे सर्वस्व हो । व्हाट्सप के बिना कई लोगों की जिंदगी बेगानी सी हो जाती है । अगर लोगों के फोन में से इस एप्प्स को ही हटा दिया जाए तो उनका मन ही नहीं लगेगा । व्हाट्सप पर एक से बढ़कर एक डीपी लगाने का शौक है तो किसी को मैसेज करने का शौक है तो किसी के पास स्टेटस बदलने ओर नए नए लगाने का शौक है ।

*कवि कृष्ण कुमार सैनी

दौसा,राजस्थान

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।