क्या सुधार की राह अपनी गलती स्वीकार करने के साथ शुरु होती है?

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यह आवश्यक नहीं है।चूंकि डाक्टर की गलतियों को रोगी भोगते हैं।पिता की गलतियों को बच्चे भोगते हैं।उसी प्रकार बच्चों की गलतियों का दण्ड मां-बाप भोगते हैं।पत्नीयों की गलतियों को पति भोगते हैं और पतियों की गलतीयां प्राय: पत्नीयां भोगती हैं।राजनेताओं की गलतियों को देशवासी भोगते हैं।मतदाओं की गलतियों को राष्ट्रभक्त भोगते हैं।दहेज प्रथाओं की गलतियों की पीड़ा कोख से लेकर दुल्हनों तक भोगती हैं।भ्रष्ट नेताओं व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों की गलतियों का दण्ड राष्ट्र भोगता है।मूर्खों की गलतियों का दण्ड बुद्धिमान भोगते देखे जाते हैं।जो आज नहीं सतयुग द्वापर त्रेता इत्यादि युगों से चलता आ रहा है।
सब से बड़ी उल्लेखनीय विडम्बना यह है कि किसी को भी अपनी गलती दिखाई ही नहीं देती।ऐसे में अपनी गलती स्वीकार कर उसे सुधारने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।क्योंकि दूसरों की गलतियां की भूलों के कारण अपने-अपने जीवन में उत्पन्न हुए मानसिक विकारों एवं तनावों को कम करने के प्रयासों को भी सुधार की राह का शुभारम्भ कहलाता है।

इन्दु भूषण बाली (जम्मू व कश्मीर)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।