प्रार्थना-पत्र 14

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सेवा में,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
दिनांक: 07 फरवरी 2020
विषय: नागरिकता संशोधन कानून CAA के पक्ष में पदयात्रा की समय रहते तुरंत अनुमति हेतु आवेदन-पत्र के
अंतर्गत
मेरी सरकार के सुसाशन के सकारात्मक एवं नकारात्मक बिंदु……. एक शोध

आदरणीय महोदय,

    आदरनीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मन की बात, बच्चों को उपदेश एवं संसद में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र और राष्ट्रीय कर्त्तव्यपालन पर उल्लेखनीय वर्णन करते हैं।जो वर्तमान में उच्चकोटी के मार्गदर्शन हैं।
उन्हीं मार्गदर्शनों से प्रेरित होकर मैंने पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने हेतु संशोधित कनून सी.ए.ए. के पक्ष में अपने स्थाई निवास खौड़ (जम्मू) से दिल्ली तक पदयात्रा का मन बनाया और 03 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को 'प्रधानमंत्री को लिखो' के सरकारी माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजा।उल्लेखनीय है कि राष्ट्र में उक्त कानून के विरोध में  उपद्रवी आगजनी, पत्थरबाजी एवं जानलेवा धातक हमलों से उत्पात मचा रहे थे।इसलिए मेरी प्रार्थना पत्र के विषय की गंभीरता का मूल्यांकन करते हुए प्रधानमंत्री के सचिव ने तुरंत उचित कार्रवाई करते हुए गृहमंत्रालय के सचिव को उचित कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी।जैसा राजा वैसी प्रजा की कहावत को चरितार्थ करते हुए गृहमंत्रालय के सचिव ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए कोआर्डीनेटर सचिव को भेज दी।
जहां से मेरी प्रार्थना पत्र को तीन संभागों में बांट दिया गया था।जिसका एक भाग जम्मू कश्मीर संभाग दूसरा सेंटर और तीसरा केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस को अग्रसर किया हुआ है।जम्मू कश्मीर संभाग को पत्रांक 13012 सलेश 3 सलेश 2019 डेश कोआर्ड दिनांक 10 जनवरी 2020 को भेजी गई।जिस पर राज्य सरकार के प्रधान सचिव द्वारा कार्रवाई करते हुए दिनांक 21 जनवरी 2020 को पत्रांक पीएस सलेश सीएस सलेश 458 डैश सी के अंतर्गत प्रेषित कर दी।जिस पर पीएस सलेश पीआरएस सलेश ग्रीवांस सलेश 1811 सलेश 20 दिनांक 22 जनवरी 2020 को प्रेषित कर दिया था।जिस पर अतिरिक्त सचिव ने दिनांक 27 जनवरी 2020 को पत्रांक जेकेजीजीसी सलेश डिवकाम सलेश 88 सलेश 017 सलेश 1992 के अंतर्गत संभाग आयुक्त को भेज दी और संभाग आयुक्त ने एक दिन के अंतराल में दिनांक 29 जनवरी 2020 को जिला जम्मू उपायुक्त को पत्रांक 901सलेश डिवकाम सलेश कम्पलेंट सलेश एलजीएस सलेश जम्मू सलेश 2098 डैश 30000 के अंतर्गत भेज दी है।
  जहां रोजाना दूरभाष से सम्पर्क साध कर पदयात्रा की अनुमति की जानकारी लेता हूँ और आयुक्त के सहायक बताते हैं कि महोदया सीट पर नहीं बैठीं।वह बताते हैं कि अनुमति हेतु आपकी फाइल मेडम के टेबल पर रखी हुई है।यह कहते-कहते आज 29 जनवरी से 7 फरवरी हो गई है और अनुमती का दूर-दूर तक अता-पता नहीं है।जबकि सुनने में आता है कि उक्त महिला उपायुक्त अत्यंत परिश्रमी, ईमानदार और कर्त्तव्यनिष्ट हैं।जिस पर मेरे राष्ट्रीय कर्त्तव्यपालन हेतु राष्ट्रहित में दी गई पदयात्रा की अनुमती पर उनकी चुप्पी एक गंभीर प्रश्न है।जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के बार-बार और यहां तक कि वह संसद में भी वक्तव्य दे चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून किसी भी भारतीय को कोई हानि नहीं देगा।चाहे वह किसी भी धर्म से सम्बंधित हो।उन्होंने कई बार स्पष्ट किया है कि सी.ए.ए. नागरिकता संशोधन कानून नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि पाक-बंगलादेश-और अफगानिस्तान से आए उत्पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है।जिसे शाहीन बाग वाले विरोधी गतिविधियों वाले उत्पाती मानना नहीं चाहते।जिस पर आधारित शाहीन बाग रूपी देशद्रोह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी की राष्ट्रभक्ति के दो पाटों में मेरी पदयात्रा की प्रार्थना पत्र क्यों पिस रही है?गणतंत्र में लोग मालिक और कर्मचारी व अधिकारी सेवक माने गये हैं।फिर 130 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री द्वारा प्रेषित समस्या के समाधान हेतु प्रत्येक कार्यालय में क्यों बुलाया जाता है?क्यों सचिव आयुक्त एवं उपायुक्त लोगों से दूरभाष पर बात नहीं करते?समस्याओं को सुलझाने के स्थान पर और अधिक उलझाते क्यों हैं।अंतता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा संसद में दिए निम्न वक्तव्य कि हमारी सरकार ने चुनौतियों को चुनौती देते हुए समस्याओं का समाधान निकालने के लिए दीर्धकालिक निति के तहत काम किया के कामों को सार्थक क्यों नहीं होने दे रहे?मेरी पदयात्रा की अनुमती से किस को हानि व पीड़ा है?इन प्रश्नचिन्हों के दृष्टिकोन को समझते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व साशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी मुझे पदयात्रा की अनुमती देकर कृतार्थ करें।सम्माननीयों

जय हिंद

प्रतिलिपि सेवा में:- (1) माननीय सांसद डा.जितेंद्र सिंह जी, शमशेर सिंह मन्हास जी एवं जुगल शर्मा सहित
(2) माननीय,डिव काम जम्मू, डीसी जम्मू और एसडीएम अखनूर व एसडीएम खौड़ एवं कई अन्यों को सूचना एवं शीघ्र उचित कार्यवाही हेतु अणुडाक अर्थात इमेल द्वारा सादर भेज दी हैं।सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
आरएसएस के स्वयंसेवक, पत्रकार, चिंतक, आलोचक, हिंदी+अंगरेज़ी+डोगरी लेखक, विचारक, शोधकर्ता एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी समीप महावीर मंदिर खौड़ कैंप,
डाकघर व तहसील:- खौड़
जिला:- जम्मू
प्रदेश जम्मू व कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।