जाते साल का शुक्रिया और आने वाले साल का स्वागत

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साल अपनी ओढ़नी हर साल बदलता है। पुराने दाग-धब्बे, फटन, मैलापन सब निकाल एक नई ओढनी धारण करता है। उस पुरानी ओढ़नी का शुक्रिया करना वह कभी नहीं भूलता क्योंकि उसने उसका साथ पूरे साल निभाया था। यही दस्तूर कई शताब्दियों से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा।
अब कुछ विश्लेषण जाते साल का कर लेते हैं। निर्विवाद रूप से हम यह कह सकते हैं कि इस साल राजनीतिक उथल-पुथल उच्च स्तर की रही। अभी हाल ही में आपने देखा होगा कि किस प्रकार से नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को लेकर राजधानी दिल्ली सहित देशभर में उथल-पुथल देखने को मिली।साल का आख़िरी महीना बहुत ही उठा-पटक वाला रहा। इस महीने नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को लेकर काफ़ी बवाल मचा। राजधानी दिल्ली और देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान कुछ अराजक तत्वों द्वारा हिंसक प्रदर्शन भी होता हुआ देखा गया। बहरहाल इस साल की सबसे बड़ी घटना जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० और ३५ए को हटाया जाना। इसे और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाना भी एक ऐतिहासिक कदम है इस जाते हुए वर्ष का। इसी साल ही अयोध्या का मसला भी सुलझाया गया। राम मंदिर बनाने का फ़ैसला भी एक बड़ी घटना के रूप में हमारे सामने आया। इसी साल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक़ जैसे अभिशाप से मुक्ति मिली। प्रियंका गांधी जी भी इसी साल राजनीति में सक्रिय दिखाई दीं। राहुल गांधी जी ने भी अध्यक्ष पक्ष से अपना इस्तीफ़ा इसी साल दिया। इसी साल के पिटारे में सर्जिकल स्ट्राइक भी आ गई। चंद्रयान-२ भला कैसे पीछे रह सकता था? उसने भी इस साल में चार चाँद लगा दिए, भले ही वह आखिर में नाकाम हो गया। इससे हौंसलों को और बल मिला और एक नए मुक़ाम को पाने में नई ऊर्जा का संचार हो गया। लगभग पाँच दशकों से सक्रिय अभिताभ बच्चन को भी इसी साल देश के सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार ‘दादा साहब फाल्के’ अवार्ड से नवाज़ा गया। भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को भी प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से इसी साल नवाज़ा गया। पोलीथीन के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई ताकि वातावरण को स्वच्छ रक्खा जा सके। स्वच्छता के लिए कई अभियान भी चलाए गए। कुल मिलाकर यह साल बहुत कुछ अपने आग़ोश में लिए हुए था। परंतु हमारा भी भारतीय होने के नाते एक कर्तव्य है, इन सब उपलब्धियों को सहेजकर रखना। कुछ कमी कुछ बदलाव हमें इस साल देखने को मिला, कोई बात नहीं साल में अगर खट्टे-मीठे अनुभव न हों तो जीने में आनंद नहीं आता।आप भी अपनी ओढ़नी बदलिए और नए साल में नए आयाम स्थापित कीजिए, इसी कामना के साथ नया साल आप सभी के लिए मंगलकारी हो। 

#नाम- नूतन गर्ग
साहित्यिक उपनाम- नूतन गर्ग
राज्य- दिल्ली
शहर- दिल्ली
शिक्षा- एम०ए०बीएड ०
कार्यक्षेत्र- शिक्षिका, लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका
प्रकाशन- कई समाचार पत्रों व पुस्तकों में प्रकाशित
सम्मान- अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा काव्य भूषण सम्मान और लघुकथा भूषण सम्मान, स्टोरी मिरर द्वारा स्टोरी राइटिंग, स्टोरी मिरर द्वारा साहित्यक कैप्टन, स्टोरी मिरर द्वारा साहित्यक कर्नल और जय नदी जय हिंद साहित्यिक समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ रचनाकार आदि
ब्लॉग-स्टोरी मिरर, प्रतिलिपि, जय विजय, अमर उजाला काव्य
अन्य उपलब्धियाँ-
लेखन का उद्देश्य- अपनी लेखनी के माध्यम से सकारात्मक दिशा देना

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।