साल अपनी ओढ़नी हर साल बदलता है। पुराने दाग-धब्बे, फटन, मैलापन सब निकाल एक नई ओढनी धारण करता है। उस पुरानी ओढ़नी का शुक्रिया करना वह कभी नहीं भूलता क्योंकि उसने उसका साथ पूरे साल निभाया था। यही दस्तूर कई शताब्दियों से चला आ रहा है और आगे भी चलता […]

आज अपनी सेवानिव्रत्ति लेकर लौटे भानुप्रसाद जी बड़े सोच में थेl दरवाज़ा खोलकर वहीं सोफे पर पसर जाते हैंl अब आगे कैसे होगा? अभी तो दो बच्चों की शादी भी नहीं हुई है और मैं सेवानिवृत्त! तभी उनकी पत्नी विमला कमरे में आ जाती हैं और कहती हैं “आज तो […]

विधा – मंदाक्रांता छंद ! विधान~ [{मगण भगण नगण तगण तगण+22} ( 222 211 111 221 221 22) 17 वर्ण, यति 4, 6,7 वर्णों पर, 4 चरण [दो-दो चरण समतुकांत] आस्था मेरी ,परम विकसी, प्यार उन्माद छाया! लीला छाई , नवरस भरी , व्यक्त आनंद पाया ! पीड़ा देती , […]

गाँव से उतर की और जाने वाली सड़क पर करीब 2 किमी की दूरी पर सडक के किनारे से लगभग तीन मीटर के फासले पर एक दलित शहीद की प्रतिमा है ! यह प्रतिमा उस दलित शहीद की शमशान पर बनी हुई है !अवकाश में गाँव आये दारोगा जी सुबह […]

अच्छे बादल सच्चे लगते ! इधर उधर मतवारे उडते !! सूरज को ढकने फिर आते ! झुंड बना कर दौड़ लगाते !! आपस में देखो टकराते ! दाँत भींचते फिर लड़ जाते !! रिमझिम रिमझिम पानी बरसे ! बादल मन धरती पर तरसे !! आओ मिलकर साथी खेलें ! बादल […]

सभ्य राजनीति तले चमकता , आधुनिक गिरावट का नाच ! क्रीत दास बौद्धिक शोभित है , अनपढ़ नेताओं की आँच! मुक्त मोह अभिनय क्षमता में , बनने लगता है निष्णात! करुणा की राख तले दबती , विवश बेबसी मौत दुखांत ! आत्म चेतना की अर्थी में, झिलमिलाता पूँजी वाद ! […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।