डिजिटलीकरण उर्फ अंधाकरण

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sunil jain
सरकार कहती है `डिजिटलीकरण` करो। बैंक कहते हैं-`अंधाकरण` करो। जब अंधे बैंक लूट सकते हैं,तो बैंक कर्मचारियों को अंधा नहीं कहा जा सकता। आप कैशलेस होना चाहते हैं,बैंक वही तो कर रहे हैं।  आपको कैशलेस और खुद को कैशवान। बैंक नारा देती है-रिश्तों की जमा पूंजी-आपको समझ में नहीं आता है,तो समझ लिजिए रिश्ते उनके,रिश्तेदार उनके,संबंध उनके,संबंधी उनके और जमा पूंजी आपकी। आप जमा करते जाइए और भूलते जाइए। गलती आपकी हो या बैंक की,ब्याज तो बैंक काट ही लेगा। एटीएम कार्ड आपका,पिन कोड आपका,आपके पास पिन कोड,कोड दिया बैंक ने, जिसने दिया उसका पता नहीं,आपको भी पता नहीं-किसने दिया पिन कोड। आपने पिन कोड बदला,आपको पता है,लेकिन किसी और को पता नहीं। आप बैठे दिल्ली में आपके एटीएम से पैसा निकला अमेरिका में। आप हैरान हैं,पत्नी तोहमत लगाती है,कौन बैठी है मुई अमेंरिका में। हमारे लिए तो साड़ी के पांच हजार नहीं निकलते,उसके लिए 24 हजार निकाल दिए। हमें तो कभी एटीएम का पिन कोड नहीं बताया,जैसे मैं ही  दुश्मन हूं और वह कलमुंही तुम्हारी कौन लगती है,जो 24 हजार निकलवा दिए।
आप समझाते हैं,गलती बैंक की है। आप लाख कोशिश करते हैं,लेकिन मामला शांत नहीं होता। आप परेशान हैं और परेशानी अब घर में घर कर गई। आप निकल पड़ते हैं बैंक के धक्के खाने। आइए धक्के खाते हैं,बैंक के,बैंक अधिकारियों के,एटीएम अधिकारी के, आपका खाता संभालने वाले कर्मचारी के। आपको बड़े अदब से कहा जाएगा-`मे आई हैल्प यू।` नहीं,इसका अर्थ है, `मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता।` आप कहेंगे मेरे एटीएम से पैसे निकले,निकले होंगे,हमें क्या पता। हम तो जमा करते हैं,निकालते तो आप हैं। आपको देखना चाहिए,आपके पैसे कैसे निकले। आप पूछेंगे-उस एटीएम का नम्बर और पता बताइए। वे कहेंगे-हमने आपसे हैल्प करने के लिए कहा है। ये कोई पोस्ट आॅफिस नहीं है कि हम आपको गली-मोहल्ला और पता बताते फिरें। ये हमारा काम नहीं है। हमारा काम है आपकी हैल्प करना। आपके पैसे जमा करना,माल्या को कर्ज देना..। हम कैसे हैल्प करते हैं आपको मालूम होना चाहिए। जब आपको रुपयों की  सख्त जरूरत होती है,हम हिसाब लगाकर हड़ताल कर देते हैं। आपको पैसा नहीं मिले,आप परेशान हों। हमें बड़ा अच्छा लगता है,जब कोई रुपए के लिए परेशान होता है। एटीएम खाली,बैंक बंद,बैंक कर्मचारी हड़ताल पर,हम क्यों न खुश हों। हमारे सामने करोड़ों रुपए पड़े होते हैं,लेकिन हम खर्च नहीं कर सकते। हम लोन दे सकते हैं,लेकिन खर्च नहीं कर सकते। आपको पैसे की जरूरत है,हम एटीएम मशीन में पैसा ही नहीं डालते हैं,कर लो..क्या कर लोगे। आप दूसरी बैंक के एटीएम पर जाओगे,प्रति ट्रांजिक्शन हमको बीस रुपए मिलेगा। हमें भी तो तन्खा देनी है,आपकी जेब काटकर ही तनखा देंगे हम। हम तो रिश्तों में विश्वास रखते हैं। हम रिश्ते बनाते हैं,गले मिलते हैं और पर्स उड़ा लेते हैं। आप तंग हो जाते हैं बैंक के अंधाकरण से,गुहार लगाने पहुंच जाते हैं थाने में।
बेटी ब्याहना आसान है,लेकिन थाने में रपट लिखाना उतना ही मुश्किल। थाने में हिन्दी में लिखा होता है-`मैं क्या आपकी मदद कर सकता हूं।` आप शुरू हो जाते हैं। आप अश्रूपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बैंक प्रबंधक से लेकर बाबू तक की कहानी सुनाते हैं। आपकी कहानी बड़े इत्मीनान से सुनी जाती है और फिर शुरू होता है `अंधाकरण।`
आपका खाता किस बैंक में है। आपने उस बैंक में ही खाता क्यों खोला,दूसरे बैंक मर गए थे? आपके पास और कोई बैंक नहीं है। अच्छा आपका वेतन खाता है। कितना वेतन मिलता है। आज तक तो आपने हफ्ता दिया नहीं। हम कैसे मान लें कि,आपको वेतन मिलता है। क्या सबूत है,आप क्या काम करते हैं। इस काम के लिए इतना वेतन नहीं मिलना चाहिए। आपके पैसे कौन से एटीएम से निकले। वह एटीएम कौन से इलाके में आता है। एटीएम का थाना कौन-सा पड़ता है। अच्छा तो आपके पैसे अमेरिका में निकले हैं। वहां कौन-से शहर से निकले,कौन-सा मोहल्ला था। वहां थाना कौन-सा लगता है। उस थाने के एसएचओ का नाम क्या है। जब आप गए नहीं,तो आपके पैसे वहां से कैसे निकल गए। इससे लगता है आप साफ-साफ झूठ बोल रहे हैं। बाकी सब तो ठीक है,लेकिन हम आपको इस झूठ के लिए कम-से-कम दो दिन पुलिस हिरासत में भेज सकते हैं जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
आप भागते हैं। कहते हुए थाने से निकल जाते हैं-मुझे कोई मदद नहीं चाहिए। यही तो बैंक वाले और पुलिस वाले चाहते हैं। रिश्तों की जमा पूंजी आप जमा करते रहें और आपके पैसे तीसरा उड़ाता रहे। आप उसकी शिकायत नहीं करें। `डिजिटलीकरण` तब ही हो सकता है जब `अंधाकरण` बंद हो जाए।
                                                                            #सुनील जैन राही
 
परिचय : सुनील जैन `राही` का जन्म स्थान पाढ़म (जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद ) हैl आप हिन्दी,मराठी,गुजराती (कार्यसाधक ज्ञान) भाषा जानते हैंl आपने बी.कामॅ. की शिक्षा मध्यप्रदेश के खरगोन से तथा एम.ए.(हिन्दी)मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया हैl  पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन देखें तो,व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी आपके नाम हैl कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में आपकी लेखनी का प्रकाशन होने के साथ ही आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हुआ हैl आपने बाबा साहेब आंबेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया हैl मराठी के दो धारावाहिकों सहित 12 आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैंl रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 45 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैंl कई अखबार में नियमित व्यंग्य लेखन जारी हैl 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।