हमारे राम

Read Time0Seconds
avinash tiwari
राम केवल नाम नही
राम जीवन का आधार है।
राम है संस्कृति हमारी
राम जड़ चेतना का व्यापक
विस्तार है।
उद्घोष जय श्री राम का
संचरण ऊर्जा का होता है
जिसे लगता युद्धघोष यह
वो विक्षुब्ध एक विकार है।
हिंसा को तुम धर्म से जोड़े
जिसका आधार आहिंसा परमो धर्म: है,
मानवता का त्रास हरा जिस राम
ने,मर्यादा जिनका गहना है।
जिस राम ने शबरी के जुठे बेर को
खाया था
हंसते हुए केंवट को अपना मित्र जिन्होंने बनाया था।
तुम स्वार्थवश राम के नाम से क्यों
भगते हो
जय श्री राम जय श्री राम कहने से
आज क्यो तुम डरते हो
राम भारत की संस्कृति है
राममय संसार है
राम जगत के पालनहार
राम ही करतार है।
#अविनाश तिवारी
जांजगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़)
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

हिमा दास

Fri Jul 26 , 2019
हिमा दास है मेडल लाई,, हम देश में जश्न मनाते हैं,, और जिन्होंने.. बेटियां कोख में मारी,, वो खड़े खड़े पछताते हैं,, बेटी की कदर हुई जिस घर में,, उस घर का रोशन नाम हुआ,, देश का मस्तक हुआ है ऊंचा,, हिमा ने ऐसा काम किया,, बेटियां पलती अभावों में,, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।