पर्व और त्योहार

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manila kumari

हिन्दुओं के पर्व त्योहारों का संक्षिप्त परिचय
 भारत में सालों भर कोई ना कोई पर्व त्योहार अवश्य मनाया जाता है l प्रतिवर्ष 1 जनवरी को आंग्ल नववर्ष के रूप में मनाया जाता है l नववर्ष की तैयारी के लिए   लोग 31 दिसंबर की रात से ही तैयारी करते हैं l 31 दिसंबर की रात के 12:00 बजते ही  लोग नव वर्ष के आगमन की खुशियाँ  मनाते हैं  l जनवरी माह के  14 तारीख को प्रतिवर्ष मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, टुसू पर्व, दही चूड़ा,खिचड़ी  आदि के रूप में मनाया जाता है l देश के हर कोने में 14 जनवरी को किसी ने किसी पर्व के रूप में मनाया जाता है l 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है l इस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था l यह राष्ट्रीय त्योहार है l इसे देश के हर जाति और धर्म के लोग मनाते हैं l माघ माह जनवरी और फरवरी के बीच होता है l इस माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है l भारत में सरस्वती को विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है l यह पर्व देश के प्रत्येक शैक्षणिक संस्थानों में मनाया जाता है l इस पूजा का आयोजन छोटे बड़े सभी छात्र बहुत उत्साह के साथ करते हैं l माघ माह में शिवरात्रि मनाया जाता है जो कि अमावस्या के एक दिन पहले और अमावस्या को मनाया जाता है l फागुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के उपरांत उसके अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है l ऋतुओं के राजा बसंत के आगमन से भारत में चारों और रंग – बिरंगे फूलों की बहार होती है l होली बसंत ऋतु में मनाया जाता है, इस अवसर पर रंग बिरंगे फूलों से प्राकृतिक रंगों को तैयार किया जाता है और उनसे होली खेला जाता है l कहीं-कहीं तो फूलों की होली भी खेली जाती है l मथुरा और ब्रज की होली पूरे भारतवर्ष में प्रख्यात है l यह त्योहार धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है l फागुन माह फरवरी और मार्च के मध्य में पड़ता है l हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह में नवरात्रि मनाया जाता है l  कहीं कहीं इस   अवसर पर छठ मनाया जाता है l नवरात्र में माता अन्नपूर्णा और वासंती माता का पूजा किया जाता है  I नवरात्रि की नवमी तिथि को रामनवमी मनाया जाता है l रामनवमी के अवसर पर विविध अखाड़ों के द्वारा विभिन्न ने साहसिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है l चैत्र माह मार्च और अप्रैल के मध्य होता है l रामनवमी के उपरांत महावीर जयंती मनाया जाता है l चैत्र माह के अंतिम दिवस को चैत्र संक्रांति के रूप में  मनाया जाता है l इसे कई जगह  सत्तुवान पर्व भी कहा जाता है l इस अवसर पर सत्तू खाने की प्रथा है l इसके अगले दिन पोइला वैशाख मनाया जाता है, जो बांग्ला और मैथिली पंचांग के अनुसार नए वर्ष का पहला दिन होता है l  जनवरी माह से अप्रैल माह के बीच कई छोटे-छोटे क्षेत्रीय पर्व त्योहार भी मनाए जाते हैं, जिनमें से कुछ जो झारखण्ड में मनाए  जाते हैं ,  उनके नाम इस प्रकार हैं- बाहा, सरहुल, मंगला ओसा, शीतला,  लोबो बुरु, चड़क, भोक्ता, ग्राम थान, सिंगबोंगा आदि l  वैशाख माह में पड़ने वाले पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है l वैशाख माह अप्रैल और मई के मध्य में पड़ता है l जून माह में रोजो पर्व और अंबुबाची मनाया जाता है l ये दोनों उड़ीसा के प्रचलित पर्व हैं  l इस अवसर पर झूला डाला  जाता है l जुलाई माह में रथयात्रा और विपत्तारिणी पूजा मनाया जाता है l सावन माह में नागपंचमी मनाया जाता है l हिंदी के अनुसार सावन माह जुलाई और अगस्त के मध्य पड़ता है l अगस्त माह में ही 15 अगस्त को राष्ट्रीय त्योहार स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है l सावन पूर्णिमा को रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है l यह भाई बहनों के पवित्र रिश्ते का त्योहार है l सावन भादो और अश्विन संक्रांति के दिन मनसा पूजा मनाया जाता है I  कहीं कहीं सावन और अश्विन माह के बीच किसी भी तिथि को मनसा पूजा मनाया जाता है l सावन में राखी पुर्णिमा के उपरांत आने वाले कृष्ण पक्ष में अष्टमी के दिन को जन्माष्टमी के रूप में मनाया    जाता हैl इस अवसर पर कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है l   5 सितंबर को प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में शिक्षक दिवस मनाया जाता  है l सितंबर माह में 17 सितंबर को प्रतिवर्ष विश्वकर्मा पूजा मनाया जाताा है l यह पूजा उत्तर भारत केेेे प्रत्येक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में मनाया जाता है l भादो महीने के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाया जाता है l इस अवसर  गणेश की पूजा की जाती है l गणेश पूजा के 26 दिन के उपरांत आश्विन नवरात्र मनाया जाता है l इस अवसर पर परिवार सहित देवी  दुर्गा की पूजा की जाती  है l  बंगाल में यह पूजा विशेष रूप से मनाया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ आतेेे हैं l इस नवरात्र केेेे दशमी के दिन को विजयादशमी के रूप में  मनाया जाता है l इस दिन रावण दहन का आयोजन किया जाता है  l अश्विन पूर्णिमा को कोजागरी लक्ष्मी पूजा मनाया जाता है l कोजागरी पूर्णिमा केे उपरांत आने वाले अमावस्या को काली पूजा मनाया जाता है l काली पूजा  के अवसर पर देश में दीपावली का उत्सव मनाया जाता हैै  l यह स्वच्छता का पर्व है l अमावस्या  के बाद ही गोवर्धन पूजा मनाया जाता हैl अमावस्या के दूसरे दिन भाई फोटा मनाया जाता  है l यह पर्व विशेष रूप से बंगाली  समुदाय में मनाया जाता है l अमावस्या के बाद आने वाले षष्ठी को छठ पूजा मनाया जाता है l छठ पूजा विशेष रूप से बिहार  में मनाया जाता है l कार्तिक माह के पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता हैै l कार्तिक माह अक्टूबर और नवंबर के मध्य होता है l अब तक बताए गए सभी पर्व त्योहारों का आयोजन बड़े  पैमाने पर होता है l इनके अलावा भी कुछ पर्व त्योहार जो व्यक्तिगत स्तर पर मनाए जाते हैं, वह सालों भर चलतेेे रहते हैं l जैसे कुछ लोग अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, अष्टमी,सोमवार,  मंगलवार,  बृहस्पतिवार, शनिवार, उपवास करते हुए मनाते हैं l
 अन्य धर्मावलंबियों के त्योहार
 ईसाईयों का त्योहार क्रिसमस संसार से पाप का नाश करने का संदेश देता है l क्रिसमस को बड़ा दिन भी कहा जाता है l यह त्योहार 25 दिसंबर को मनाया जाता है l लोग 24 दिसंबर की रात से ही यीशु के जन्म की ख़ुशी  मनाते हैं l ईसाईयों का दूसरा बड़ा त्योहार गुड फ्राइडे है l
 मुस्लिमों का ईद सबसे बड़ा त्योहार होता है l ईद से पूर्व 1 माह रमजान का महीना होता है l इस माह में बच्चे- बड़े, महिला- पुरुष सभी दिन भर का उपवास रखते हैं और रात को भोजन करते हैं l यह बहुत कठिन  उपवास होता है l इसमें पानी तक नहीं पिया जाता है, फिर भी लोग बड़े उत्साह से इस उपवास को करते हैं और ईद का चांद देखकर ईद का त्योहार मनाते हैं l दूसरा बड़ा त्योहार मोहर्रम होता है l इसमें लोग मोहम्मद की शहादत का दुख मनाते हैं l बकरीद भी मुस्लिमों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है l मुस्लिमों के सभी त्योहार चाँद की दशा  पर आधारित होते हैं l यह त्योहार प्रतिदिन की दिनचर्या से अलग होते हैं और लोगों में नया जोश,उत्साह, उमंग, आपसी भाईचारा और सौहार्द की भावना को जागृत करते हैं l
 जैन धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा पर्व महावीर जयंती है, जिसे वे आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाते हैं l
 सिक्ख धर्मावलंबी के लोग गुरु गोविंद सिंह जयंती, गुरु नानक जयंती, लोहड़ी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं l इस अवसर पर अरदास का आयोजन किया जाता है और रैली निकाली जाती है l इस रैली में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता कोई बड़ा कोई छोटा नहीं होता l सभी में एक अलग ही जोश और उमंग और उत्साह होता है, अपने करतब दिखाने का l लोग इन पर्व त्योहारों का सालों भर इंतजार करते हैं l
पर्व – त्योहार का महत्व
 भारत में मनाए जाने वाले विभिन्न  पर्व त्योहार लोगों के जीवन में उत्साह और जोश का संचार करते हैं l इनसे भाईचारा बढ़ता है, आपसी सौहार्द बढ़ता है और
दैनिक नीरस जीवन स्फूर्ति से भर जाता है l भारत कृषि प्रधान देश है, इसलिए यहाँ  के अधिकांश पर्व त्योहार कृषि से संबंधित होते हैं l जनवरी माह टुसु गीतों से सराबोर रहता है, तो फागुन फाग से l चैत्र राम नाम और छठ गीतों से सना रहता है तो आषाढ़ बरखा के गीतों से l दुर्गा पूजा में दुर्गा स्त्रोत सुनाई पड़ते हैं तो काली पूजा में रूद्र चंडी पाठ की गूँज होती है l हर पर्व -त्योहार अपनी कुछ खासियत लिए होती हैं l यह पर्व त्योहार  भारतीयों के जीवन में संस्कार को सुदृढ़ करते हैं और उनकी धर्म के प्रति आस्था को बनाए रखते हैं l ऐसा केवल हिन्दू पर्व -त्योहार ही नहीं करते हैं बल्कि विविध धर्मावलंबियों के त्योहार भी उनमें नवजोश भरते हैं l
 मनुष्य को अपने जीवन में कई कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वाह करना होता है l अपने कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन में इतना व्यस्त हो जाता है कि अपने मनोरंजन के लिए समय भी नहीं निकाल पाता  l ऐसी स्थिति में सामाजिक मान्यताओं, परंपराओं एवं पूर्व संस्कारों पर आधारित पर्व और त्योहार उसके जीवन में नवीनता का संचार करते हैं l जिस प्रकार प्रत्येक धर्म, संप्रदाय और जाति की अलग -अलग मान्यता होती है, उसी प्रकार अलग -अलग पर्व त्योहारों को मनाने की विधियाँ भी अलग -अलग होती हैं l प्रत्येक पर्व त्योहार धार्मिक परंपरा का निर्वहन करने के साथ-साथ जाति, समाज, देश और राष्ट्र को कोई ना कोई विशेष संदेश अवश्य देते हैं l यह पर्व त्योहार लोगों के मन में अलग सकारात्मक सोच, उत्साह, जोश और आनंद का संचार करते हैं l पर्व त्योहार व्यक्ति के दिनचर्या के दुःख -पीड़ा को भुलाने में मदद करते  हैं, साथ ही उनके  नीरस जीवन को सरस बनाते  हैं l इस अवसर पर किए जाने वाले अनुष्ठान मनुष्य को प्रकृति के निकट लाते हैं l हवन यज्ञ आदि करने से अपने आसपास का वातावरण शुद्ध होता है l सभी पर्व त्योहार अलग-अलग संदेशों से युक्त होते हैं, जैसे दशहरा असत्य पर सत्य की विजय, रक्षाबंधन भाई बहनों के प्यार,होली अधर्म पर धर्म की विजय आदि l पर्व त्योहार आपसी वैमनस्य भुला भाईचारे के साथ नवउमंग से जीवनयापन का संदेश देते हैं l
#डॉ मनीला कुमारी

परिचय : झारखंड के सरायकेला खरसावाँ जिले के अंतर्गत हथियाडीह में 14 नवम्बर 1978 ई0 में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल में हुआ। उच्च शिक्षा डी बी एम एस कदमा गर्ल्स हाई स्कूल से प्राप्त किया और विश्वविद्यालयी शिक्षा जमशेदपुर वीमेन्स कॉलेज से प्राप्त किया। कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय सम्मेलनों में पत्र प्रस्तुत किया ।ज्वलंत समस्याओं के प्रति प्रतिक्रिया विविध पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है। प्रतिलिपि और नारायणी साहित्यिक संस्था से जुड़ी हुई हैं। हिन्दी, अंग्रेजी और बंगला की जानकारी रखने वाली सम्प्रति ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय में पदस्थापित हैं और वहाँ के छात्र -छात्राओं को हिन्दी की महत्ता और रोजगारोन्मुखता से परिचित कराते हुए हिन्दी के सामर्थ्य से अवगत कराने का कार्य कर रहीं हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।